अभिषेक बनर्जी के बैंक खाते फ्रीज होने के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई बुधवार को

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने निजी बैंक खाते को कथित तौर पर फ्रीज किए जाने के खिलाफ सोमवार को कोलकाता हाईकोर्ट का रुख किया है। जस्टिस कृष्णा राव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी की विधिक टीम को सुनवाई से पहले सभी संबंधित पक्षों को औपचारिक नोटिस भेजने का निर्देश दिया है।

बैंक की कार्रवाई पर उठाए सवाल

अदालत के समक्ष बनर्जी का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता अयान भट्टाचार्जी ने कहा कि एक निजी बैंक ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाए बिना और बिना किसी पुलिस निर्देश के उनका खाता फ्रीज कर दिया है। विदेश में इलाज कराने के लिए वित्तीय संसाधनों की जरूरत का हवाला देते हुए इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी।

मामले में जारी जांच से जुड़े जस्टिस राव के सवाल का जवाब देते हुए अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट पहले ही सांसद को जारी जांच के सिलसिले में दंडात्मक कार्रवाई से राहत दे चुका है और बनर्जी अदालत द्वारा तय की गई सभी शर्तों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट से मिली थी इलाज के लिए विदेश जाने की इजाजत

READ ALSO  53 शहरों में AIBE 17 में 1,71,402 वकीलों ने प्रतिभाग किया 

हाईकोर्ट में यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद दायर की गई है, जिसमें पिछले सप्ताह बनर्जी को आंखों के ऑपरेशन के लिए तीन सप्ताह के लिए विदेश जाने की अनुमति दी गई थी।

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने माना कि सांसद के विदेश जाने में कोई गंभीर बाधा नहीं है। शीर्ष अदालत ने जांच एजेंसियों के समक्ष उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की शर्तों के साथ यह मंजूरी दी थी।

READ ALSO  दिल्ली हाई कोर्ट ने यस बैंक के स्ट्रेस एसेट्स पोर्टफोलियो के हस्तांतरण की जांच के लिए पैनल बनाने के लिए जनहित याचिका पर केंद्र, आरबीआई से जवाब मांगा

राज्य सरकार की आपत्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस.वी. राजू ने विदेश यात्रा का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने तर्क दिया था कि बनर्जी के खिलाफ कम से कम 15 आपराधिक मामले लंबित हैं, जिससे उनके देश वापस न लौटने का जोखिम अधिक है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इन आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को विदेश जाने और अपनी पसंद का इलाज कराने का मौलिक अधिकार है। अदालत ने स्वास्थ्य संबंधी गोपनीयता के अधिकार पर बल देते हुए यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह अपने मेडिकल रिकॉर्ड सार्वजनिक करे।

READ ALSO  ग्राम विकास अधिकारी 'राजस्व प्राधिकारी' नहीं, सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान पर कार्यवाही शुरू नहीं कर सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles