कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जनगणना का काम और बच्चों की पढ़ाई, दोनों प्रक्रियाएं बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलनी चाहिए। शुक्रवार को शिक्षकों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि जनगणना कार्य में तैनात शिक्षकों की व्यक्तिगत और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान निकाला जाए, ताकि स्कूलों में पठन-पाठन प्रभावित न हो।
शिक्षकों ने सरकारी अधिसूचना को दी चुनौती
यह मामला शिक्षकों के एक समूह द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने जनगणना कार्य के लिए प्रगणक (इन्यूमेरेटर) और पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) के रूप में अपनी नियुक्ति करने वाली सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का पक्ष था कि मौजूदा समय-सारणी और नियमों के तहत अपने शिक्षण दायित्वों के साथ-साथ जनगणना का काम पूरा करना बेहद कठिन है।
शिक्षकों ने अदालत को बताया कि उनमें से कई को रोजाना 40 से 60 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करके स्कूल पहुंचना पड़ता है। वे रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक ड्यूटी करते हैं। पूरे हफ्ते में केवल रविवार ही उनकी एकमात्र छुट्टी का दिन होता है, ऐसे में निर्धारित समय के भीतर जनगणना का काम पूरा करना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा है।
रविवार की छुट्टी पर काम कराने पर हाईकोर्ट का सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव ने कहा कि कोर्ट चाहता है कि छात्रों की शिक्षा पर असर डाले बिना जनगणना का काम जारी रहे, लेकिन इसके साथ ही प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शिक्षक अपनी निजी और व्यावहारिक कठिनाइयों के बावजूद इस काम को पूरा कर सकें।
अदालत ने सवाल उठाया कि जो शिक्षक हर दिन 40 या 60 किलोमीटर दूर से आकर सुबह 10 से शाम 4 बजे तक काम कर रहा है और उसे सिर्फ रविवार को छुट्टी मिलती है, क्या उससे अतिरिक्त मानदेय के आधार पर उस दिन भी जनगणना का काम कराया जाना चाहिए? हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना प्रशासनिक अधिकारियों का दायित्व है।

