पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में लगभग 50 करोड़ रुपये मूल्य के सोने और नकद की बरामदगी के मामले में नाम सामने आने के बाद कथित बालू माफिया मो. नजीबुद्दीन मंडल उर्फ तुलू मंडल ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कराने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को तय की है।
वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने मंडल की ओर से याचिका दाखिल करते हुए अदालत में पक्ष रखा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ की गई कार्रवाई गलत मंशा और दुर्भावना से प्रेरित है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि मामले की सुनवाई 20 अगस्त को रखी जाए ताकि तुलू मंडल खुद अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकें। जस्टिस भट्टाचार्य ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए मामले को निर्धारित तिथि पर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
रिश्तेदार के ठिकाने से मिला था सोना और कैश
यह मामला जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई एक बड़ी पुलिस छापेमारी से जुड़ा है। पुलिस ने बीरभूम जिले में तुलू मंडल के एक रिश्तेदार के घर पर दबिश दी थी, जिसे मंडल का ठिकाना माना जा रहा था। इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने 15 किलोग्राम सोना और बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की थी, जिसका कुल मूल्यांकन लगभग 50 करोड़ रुपये किया गया था।
बीरभूम जिले में बालू खनन, पत्थर खदान और परिवहन नेटवर्क संचालित करने के आरोपी तुलू मंडल इस जब्ती के बाद से ही सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि पुलिस लगातार उनकी तलाश कर रही है।
सिंडिकेट के खिलाफ जारी रहेगी कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया कि राज्य में माफिया सिंडिकेट के खिलाफ चौकसी और बिना किसी समझौते के सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

