बार एसोसिएशन चुनावों में महिलाओं को सभी कार्यकारी पदों पर रोटेशन के आधार पर 30% आरक्षण देना अनिवार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि बार एसोसिएशनों में महिला अधिवक्ताओं के लिए 30 प्रतिशत का अनिवार्य आरक्षण कार्यकारी समिति के सभी पदों पर रोटेशनल आधार पर लागू होना चाहिए। सुल्तानपुर बार एसोसिएशन से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने महिला वकीलों के लिए तैयार किए गए 30 प्रतिशत आरक्षण रोस्टर के तहत नए सिरे से नामांकन की अनुमति देने के लिए आगामी चुनाव को स्थगित कर नया कार्यक्रम जारी करने का निर्देश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका सुल्तानपुर बार एसोसिएशन की सदस्य शशि मिश्रा द्वारा दायर की गई थी। याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पेशल लीव पिटीशन (सिविल) संख्या 1404/2025 (दीक्षा एन अमृतेश बनाम कर्नाटक राज्य व अन्य) में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत जारी निर्देशों का पालन कराने के लिए परमादेश जारी करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने सुल्तानपुर बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति और गवर्निंग काउंसिल में महिला अधिवक्ताओं को 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का अनुरोध किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न आदेशों के माध्यम से देशभर की सभी बार एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत कोटा अनिवार्य किया है। 13 मार्च 2026 के अपने आदेश में शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की थी:

“इस बैच के मामलों में विचारणीय मुख्य मुद्दा यह सुनिश्चित करना है कि तालुका या जिला स्तर के साथ-साथ कर (Tax) और रेरा (RERA) जैसे विशेष निकायों और हाईकोर्ट बार एसोसिएशनों सहित हर बार एसोसिएशन में पदाधिकारियों या कार्यकारी सदस्यों के रूप में महिला वकीलों को 30% प्रतिनिधित्व मिले।”

इसके बाद, 16 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश का पालन न करने पर कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया था:

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“हम चेतावनी के तौर पर यह भी स्पष्ट करना आवश्यक समझते हैं कि जहां भी बार एसोसिएशनों ने ऊपर दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया है या उल्लंघन करते पाए जाएंगे, ऐसे बार एसोसिएशनों को न्यायिक आदेश के जरिए निलंबित किया जा सकता है और नए चुनाव कराने का निर्देश दिया जाएगा।”

प्रस्ताव और तर्क

सुनवाई के दौरान सुल्तानपुर बार एसोसिएशन के वकील ने हाईकोर्ट को सूचित किया कि एसोसिएशन के उप-नियमों (bye-laws) में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रस्ताव के तहत कोषाध्यक्ष (Treasurer) का एकमात्र पद, 15 वर्ष से अधिक के अनुभव वाले गवर्निंग काउंसिल सदस्यों के चार में से दो पद, और 15 वर्ष से कम अनुभव वाले सदस्यों के चार में से दो पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए थे।

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कोर्ट का विश्लेषण

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बार एसोसिएशन द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि आरक्षण को केवल कुछ सीमित पदों तक सीमित रखना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की मूल भावना को पूरा नहीं करता।

प्रस्ताव का मूल्यांकन करते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की:

“हमारी राय है कि यह महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है और न ही यह माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेशों के शब्द और भावना के अनुरूप है। बोर्ड भर में यानी सभी पदों के संबंध में महिलाओं के लिए 30% आरक्षण होना चाहिए।”

निर्णय और चुनावी निर्देश

पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने सुल्तानपुर बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति के सभी पदों पर एक विशिष्ट रोटेशनल आरक्षण ढांचा तय किया:

  • संयुक्त सचिव: कुल तीन पदों में से एक पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा।
  • कोषाध्यक्ष, महासचिव और उपाध्यक्ष: वर्तमान चुनाव में ये पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे। इसके बाद, इन पदों पर प्रत्येक तीसरे वर्ष (2029 से शुरू) रोटेशन के आधार पर आरक्षण लागू होगा।
  • अध्यक्ष और वरिष्ठ उपाध्यक्ष: ये पद अगले चुनाव चक्र यानी 2027 में महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे और उसके बाद हर तीसरे साल (2030 से शुरू) रोटेशन के आधार पर आरक्षित होंगे।
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चूंकि चुनाव की तारीख घोषित की जा चुकी थी, इसलिए हाईकोर्ट ने नए सिरे से नामांकन की अनुमति देने के लिए इसे स्थगित करने का निर्देश दिया। रिटर्निंग ऑफिसर और एल्डर कमेटी को आदेश दिया गया कि वे इस रोस्टर के अनुसार चुनाव का पुननिर्धारण करें।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई आरक्षित पद रिक्त रह जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रशासनिक न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश द्वारा नामांकन किया जाएगा।

मामले का विवरण

मामले का शीर्षक: शशि मिश्रा बनाम बार काउंसिल ऑफ यूपी द्वारा सचिव व 2 अन्य
वाद संख्या: जनहित याचिका (पीआईएल) संख्या 646 / 2026
पीठ: जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला

याचिकाकर्ता के वकील: वरिष्ठ अधिवक्ता ए. एम. त्रिपाठी, सहायता हेतु अधिवक्ता अरविंद कुमार मिश्रा

हस्तक्षेपकर्ता के वकील: अधिवक्ता एस. के. सिंह

सुल्तानपुर बार एसोसिएशन (विपक्षी संख्या 3) के वकील: अधिवक्ता ओ. पी. तिवारी

हाईकोर्ट (विपक्षी संख्या 2) के वकील: अधिवक्ता शिशिर जैन

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के वकील: अधिवक्ता रोशन बाबू (अधिवक्ता सुभाष चंद्र पांडे के पक्ष में)

निर्णय की तिथि: 10 अगस्त 2026

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