सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ द्वारा दिए गए एक निर्णय में स्पष्ट किया कि अलग-अलग टैरिफ हेडिंग के तहत आने वाली डायग्नोस्टिक मशीनों के साथ इस्तेमाल होने वाले आयातित एक्सेसरीज को कस्टम्स टैरिफ हेडिंग (CTH) 9018 के तहत डायग्नोस्टिक अपैरेटस के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता। इसके बजाय, ऐसे सामानों को अनिवार्य रूप से रेजिड्यूअरी CTH 9033 00 00 के तहत वर्गीकृत किया जाना चाहिए। मेसर्स केयरस्ट्रीम हेल्थ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने निचले प्राधिकारियों और सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क व सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (CESTAT) के निष्कर्षों को बरकरार रखा। अदालत ने निर्णय दिया कि विभिन्न टैरिफ प्रविष्टियों वाली मशीनों के साथ एक्सेसरी के रूप में काम करने वाले लेजर इमेजर कस्टम्स टैरिफ एक्ट, 1975 के अध्याय 90 के नोट्स के नियम 2(सी) के दायरे में आते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
अपीलकर्ता, केयरस्ट्रीम हेल्थ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2 अप्रैल 2013 के बिल ऑफ एंट्री के तहत चीन से ‘ड्राईव्यू 6850 लेजर इमेजर W/3D’ का आयात किया था। कंपनी ने आयातित सामान को कस्टम्स टैरिफ एक्ट, 1975 की प्रथम अनुसूची के खंड XVIII के अध्याय 90 के तहत CTH 9018 90 19 में यह दावा करते हुए वर्गीकृत किया कि वे “अन्य डायग्नोस्टिक उपकरण और अपैरेटस” के रूप में योग्य हैं।
हालांकि, सीमा शुल्क, चेन्नई के सहायक आयुक्त ने 24 जून 2013 के अपने आदेश (Order-in-Original) के माध्यम से इस वर्गीकरण को खारिज कर दिया और इसे CTH 9033 00 00 के तहत फिर से वर्गीकृत करने का निर्देश दिया। यह श्रेणी अध्याय 90 की ऐसी मशीनों के एक्सेसरीज के लिए है जो इस अध्याय में अन्यत्र निर्दिष्ट या शामिल नहीं हैं। सीमा शुल्क आयुक्त (अपील), चेन्नई ने 10 मार्च 2014 को इस दृष्टिकोण की पुष्टि की। इसके बाद CESTAT की दक्षिण क्षेत्र पीठ, चेन्नई ने 21 अगस्त 2024 को आयातक की अपील खारिज कर दी। इन निर्णयों से व्यथित होकर कंपनी ने सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 130E(b) के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उस समय दोनों टैरिफ हेडिंग के बीच शुल्क का अंतर 2.5% था, जिसके परिणामस्वरूप ₹5,21,616/- की अंतर शुल्क मांग उत्पन्न हुई थी।
पक्षकारों के तर्क
आयातित लेजर इमेजर एक ऐसा प्रिंटर है जो फिल्म पर फोटो विकसित करने के लिए फोटो थर्मोग्राफिक (ड्राई लेजर) तकनीक का उपयोग करता है। यह मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI), कम्प्यूटेड टोमोग्राफी (CT), फुल-फील्ड डिजिटल मैमोग्राफी (FFDM), डिजिटल रेडियोलॉजी (DR), कम्प्यूटेड रेडियोग्राफी (CR), पिक्चर आर्काइविंग एंड कम्युनिकेशन सिस्टम (PACS) और डिजिटल फ्लोरोस्कोपी जैसी डिजिटल डायग्नोस्टिक मशीनों से जुड़ता है। इसका उपयोग अन्य ग्रेस्केल फिल्म अनुप्रयोगों के लिए भी किया जा सकता है। हालांकि, इसमें अपनी कोई स्वतंत्र डायग्नोस्टिक क्षमता नहीं होती है।
अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि लेजर इमेजर कोई ‘पार्ट’ या ‘एक्सेसरी’ नहीं है, बल्कि डायग्नोस्टिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक ‘अपैरेटस’ है। चूंकि इसका उपयोग CTH 9018 के तहत वर्गीकृत मेडिकल मशीनों के साथ किया जाता है, इसलिए कंपनी का कहना था कि इसे CTH 9018 90 19 के तहत रेजिड्यूअरी डायग्नोस्टिक अपैरेटस के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए। अपीलकर्ता ने 17 मार्च 2012 की अधिसूचना संख्या 12/2012 पर भी भरोसा करने का प्रयास किया, जिसमें CTH 9018 सहित निर्दिष्ट हेडिंग के तहत आने वाले सामानों के लिए 5% की मानक सीमा शुल्क दर का प्रावधान था।
इसके विपरीत, कस्टम्स विभाग (राजस्व) ने तर्क दिया कि आयातित लेजर इमेजर न केवल CTH 9018 के तहत आने वाली मशीनों के साथ, बल्कि CTH 9022 (जैसे CT अपैरेटस और एक्स-रे जनरेटर) के तहत आने वाले उपकरणों के साथ भी उपयोग के योग्य है। इसलिए, राजस्व ने रुख अपनाया कि यह उत्पाद रेजिड्यूअरी CTH 9033 00 00 के दायरे में आता है, जो अध्याय 90 की मशीनों के उन पार्ट्स और एक्सेसरीज को कवर करता है जिन्हें अन्यत्र निर्दिष्ट नहीं किया गया है।
कोर्ट का विश्लेषण
सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ता के इस दावे को खारिज कर दिया कि लेजर इमेजर अपने आप में एक डायग्नोस्टिक अपैरेटस है। पीठ ने टिप्पणी की:
“स्वीकार्य रूप से, लेजर इमेजर में अपनी कोई डायग्नोस्टिक क्षमता या कौशल नहीं है और फिल्म प्रिंट करने के अपने कार्य को पूरा करने के लिए इसे अनिवार्य रूप से डायग्नोस्टिक उपकरणों से इनपुट प्राप्त करना होता है। वास्तव में, यह उस डायग्नोस्टिक उपकरण का एक ‘एक्सेसरी’ है जिससे यह इनपुट प्राप्त करता है, क्योंकि यह केवल उस डाटा को फिल्म पर ट्रांसफर करता है। CTH 9018 90 19 केवल ‘अन्य डायग्नोस्टिक उपकरणों और अपैरेटस’ पर लागू होता है। चूंकि लेजर इमेजर की अपनी कोई डायग्नोस्टिक क्षमता नहीं है, इसलिए इसे इस हेडिंग के तहत वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है।”
अपीलकर्ता द्वारा संदर्भित नजीर कमिश्नर ऑफ कस्टम्स, नई दिल्ली बनाम सी-नेट कम्युनिकेशन (इंडिया) (प्रा.) लिमिटेड (2007) का अंतर स्पष्ट करते हुए कोर्ट ने कहा:
“इस परीक्षण को लागू करने पर यह स्पष्ट है कि लेजर इमेजर उस मेडिकल उपकरण के प्रदर्शन में न तो कोई सहायता करता है और न ही उसे बढ़ाता है जिससे वह इनपुट प्राप्त करता है। यह केवल मेडिकल पेशेवरों द्वारा संरक्षण या आगे के उपयोग के लिए ऐसे इनपुट को फिल्म पर स्थानांतरित करने का सहायक कार्य करता है। डायग्नोस्टिक कार्य करने वाला मेडिकल उपकरण अपने आप में पूर्ण है और लेजर इमेजर उस प्रक्रिया में किसी भी तरह का योगदान नहीं देता है। वास्तव में, यह केवल ट्रांसमिट किए गए डायग्नोस्टिक डाटा को फिल्मों पर प्रिंट करके ऐसे मेडिकल उपकरण के लिए एक एक्सेसरी के रूप में कार्य करता है।”
अधिसूचना संख्या 12/2012 के संबंध में कोर्ट ने माना कि अधिसूचना तालिका के क्रम संख्या 473 में CTH 9033 को सूचीबद्ध नहीं किया गया था। इसके अलावा, अपीलकर्ता ने इस अधिसूचना का मुद्दा पहली बार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया था, जबकि इससे जुड़ी शर्तों के अनुपालन को पहले साबित नहीं किया गया था।
एक्सेसरीज के वर्गीकरण का मूल्यांकन करने के लिए कोर्ट ने अध्याय 90 के नोट 2 का परीक्षण किया। नियम 2(बी) के अनुसार, यदि पार्ट्स और एक्सेसरीज केवल या मुख्य रूप से किसी विशेष प्रकार की मशीन या एक ही हेडिंग की मशीनों के साथ उपयोग के योग्य हैं, तो उन्हें उन्हीं मशीनों के साथ वर्गीकृत किया जाता है। नियम 2(सी) कहता है कि अन्य सभी पार्ट्स और एक्सेसरीज को हेडिंग 9033 के तहत वर्गीकृत किया जाना है।
अन्नपूर्णा कार्बन इंडस्ट्रीज कंपनी बनाम स्टेट ऑफ आंध्र प्रदेश (1976) के न्यायिक फैसले का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने रेखांकित किया कि एक ही वस्तु एक से अधिक प्रकार के उपकरणों के लिए एक्सेसरी के रूप में काम कर सकती है। अपीलकर्ता के अपने उत्पाद कैटलॉग से ही यह साबित हुआ कि लेजर इमेजर CTH 9018 (जैसे अल्ट्रासाउंड स्कैनर, MRI अपैरेटस और इको कार्डियोग्राफ) के साथ-साथ CTH 9022 (जैसे CT अपैरेटस और एक्स-रे जनरेटर) के तहत आने वाली मशीनों के साथ भी संगत थे।
नियम 2(बी) की व्याख्या करते हुए कोर्ट ने कहा:
“जब नियम 2(बी) किसी विशेष प्रकार की मशीन या एक ही टैरिफ हेडिंग की कई मशीनों के साथ ‘केवल या मुख्य रूप से’ उपयोग के लिए उपयुक्त एक्सेसरीज की बात करता है, तो यह स्पष्ट रूप से ऐसे एक्सेसरीज को अलग-अलग टैरिफ हेडिंग के तहत आने वाली कई मशीनों के साथ उपयोग किए जाने वाले एक्सेसरीज से अलग करता है।”
कोर्ट ने CTH 9018 (7.5%) और CTH 9022 (10% या 15%) के तहत आने वाली मशीनों पर लागू टैरिफ शुल्क दरों में अंतर को रेखांकित करते हुए कहा:
“ऐसी स्थिति में, जब CTH 9018 और CTH 9022 के तहत आने वाली मशीनों पर अलग-अलग टैरिफ ड्यूटी दरें लागू होती हैं, तो दोनों तरह की मशीनों के साथ इस्तेमाल होने वाले एक्सेसरी पर नियम 2(बी) को लागू करना तर्क और औचित्य के विपरीत है।”
फैसला
CESTAT के आदेश को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला:
“परिणामस्वरूप, एक ही टैरिफ हेडिंग के तहत आने वाली कई मशीनों, उपकरणों या अपैरेटस के साथ उपयोग के लिए उपयुक्त एक्सेसरीज को उन्हीं मशीनों, उपकरणों या अपैरेटस के साथ वर्गीकृत किया जाएगा। लेकिन जब ऐसे एक्सेसरीज न केवल किसी विशेष टैरिफ हेडिंग की मशीनों के साथ, बल्कि दूसरे टैरिफ हेडिंग के तहत आने वाली मशीनों के साथ भी इस्तेमाल के योग्य हों, तो उन्हें अनिवार्य रूप से रेजिड्यूअरी CTH 9033 00 00 के तहत लाया जाएगा, क्योंकि वे अध्याय 90 के तहत आने वाली ऐसी मशीनों, उपकरणों या अपैरेटस के एक्सेसरीज हैं जिन्हें किसी विशिष्ट टैरिफ हेडिंग के तहत शामिल नहीं किया गया है।”
अपील में कोई मैरिट न पाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और सभी लंबित आवेदनों का निपटारा कर दिया।
मामले का विवरण
मामले का शीर्षक: मेसर्स केयरस्ट्रीम हेल्थ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम कस्टम कमिश्नर
वाद संख्या: सिविल अपील संख्या 3440/2025
पीठ: जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा
निर्णय की तिथि: 12 अगस्त 2026

