पटना हाईकोर्ट ने गंभीर बीमारी से जूझ रहे पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के एक एसोसिएट प्रोफेसर के प्रतिनियुक्ति आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने विश्वविद्यालय के कुलपति को निर्देश दिया है कि वे शिक्षक की नाजुक स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए, पटना के निकट किसी कॉलेज में उनके तबादले के आवेदन पर दो सप्ताह के भीतर सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लें।
बिना सहमति जारी हुआ था प्रतिनियुक्ति आदेश
जस्टिस हरिश कुमार की एकल पीठ ने 7 अगस्त को नौबतपुर स्थित एमडी कॉलेज में हिंदी के एसोसिएट प्रोफेसर की याचिका पर यह आदेश जारी किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 20 जून को एक आदेश जारी कर प्रोफेसर को उनकी सहमति लिए बिना ही नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेज, घोसवरी में प्रभारी प्राचार्य के पद पर प्रतिनियुक्त कर दिया था।
इलाज के लिए पटना के पास तैनाती की मांग
याचिकाकर्ता पिछले कुछ वर्षों से क्रॉनिक किडनी डिजीज (स्टेज-5) जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से पीड़ित हैं। उनका इलाज एम्स पटना और सीएमसी वेल्लोर जैसे प्रमुख अस्पतालों में चल रहा है।
चिकित्सीय आवश्यकताओं का हवाला देते हुए उन्होंने 17 मार्च को ही दानापुर स्थित बी.एस. कॉलेज में रिक्त पद पर स्थानांतरण के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को आवेदन दिया था। इस आवेदन पर कार्रवाई करने के बजाय विश्वविद्यालय ने उन्हें दूरस्थ स्थान पर तैनात कर दिया। इस आदेश के खिलाफ दिए गए अभ्यावेदनों पर कोई ध्यान न दिए जाने के बाद प्रोफेसर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
विश्वविद्यालय को दो सप्ताह का समय
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता की स्वास्थ्य स्थिति अत्यंत नाजुक है और उन्हें निरंतर चिकित्सीय देखभाल की आवश्यकता है। हाईकोर्ट ने कुलपति को मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश देते हुए 20 जून के प्रतिनियुक्ति आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।
सुनवाई के दौरान पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता आनंद कुमार, राजन प्रकाश और प्रज्ञा किरण ने किया। हालांकि, विश्वविद्यालय की ओर से याचिकाकर्ता की बीमारी या स्थानांतरण आवेदन के संबंध में कोई ठोस प्रतिवाद प्रस्तुत नहीं किया गया।

