भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और आधुनिक कानूनी ढांचे के दम पर देश के पास मध्यस्थता (मीडिएशन) का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनने की पूरी क्षमता है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शुक्रवार को ‘माध्यम इंटरनेशनल काउंसिल फॉर कन्फ्लिक्ट रेजोल्यूशन’ द्वारा आयोजित ‘इंटरनेशनल एडीआर कॉन्फ्रेंस 2026’ के उद्घाटन समारोह में यह बात कही। सीजेआई ने जोर देकर कहा कि देश के संस्थान अब जटिल और अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक विवादों को सुलझाने में पूरी तरह सक्षम हो रहे हैं।
असाधारण आर्थिक वृद्धि और वैधानिक ढांचा
सीजेआई ने कहा कि मध्यस्थता अधिनियम, 2023 ने देश में पहली बार वैकल्पिक विवाद समाधान के लिए एक स्वतंत्र और मजबूत वैधानिक ढांचा प्रदान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत जिस रफ्तार से आर्थिक प्रगति कर रहा है, उसे देखते हुए केवल बुनियादी ढांचा होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि देश को एक अत्याधुनिक विवाद समाधान ढांचा विकसित करने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट, न्यायपालिका और कोर्ट से जुड़े मध्यस्थता केंद्रों के निरंतर सहयोग से भारतीय संस्थान अब अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल केंद्रों की तर्ज पर दक्षता और आत्मविश्वास के साथ काम कर रहे हैं।
90 प्रतिशत तक स्वैच्छिक अनुपालन
पारंपरिक मुकदमों और आर्बिट्रेशन की तुलना में मध्यस्थता की सफलता को रेखांकित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाए गए मामलों में स्वैच्छिक अनुपालन की दर 90 प्रतिशत तक देखी गई है, जो अदालती फैसलों की तुलना में काफी अधिक है। उन्होंने समझाया कि मध्यस्थता विवादों के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को संबोधित करती है। यह पक्षों पर कोई फैसला थोपने के बजाय उनसे यह पूछती है कि वे किस समाधान को स्वीकार कर सकते हैं और किस आधार पर आगे बढ़ सकते हैं।
आधुनिकता और डिजिटल तकनीक से आया बदलाव
मध्यस्थता के विकासक्रम पर बात करते हुए सीजेआई ने कहा कि अतीत में मध्यस्थता को पुराने कमरों, साधारण व्यवस्था और अनचाहे समझौतों से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन आज यह क्षेत्र पूरी तरह पेशेवर बन चुका है। अब एक कठोर प्रमाणन प्रक्रिया के तहत प्रशिक्षित युवा विशेषज्ञ कॉर्पोरेट, व्यावसायिक और पारिवारिक विवादों को सुलझा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में संस्थागत मध्यस्थता केंद्र समर्पित केस प्रबंधकों, एन्क्रिप्टेड डिजिटल फाइलों और त्वरित प्रमाणीकरण प्रक्रियाओं से लैस हैं, जिससे समझौते हफ्तों के बजाय महज कुछ घंटों में अंतिम रूप ले लेते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन विवाद समाधान प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से अलग-अलग महाद्वीपों में स्थित पक्ष भी आसानी से मध्यस्थता प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं।
कानूनी बिरादरी से आह्वान
समारोह के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने वकीलों और कानूनी बिरादरी से देश के वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) ढांचे को अधिक मजबूत करने का आह्वान किया, ताकि भारत दुनिया भर में मध्यस्थता के क्षेत्र में अग्रणी स्थान हासिल कर सके।

