टीएमसी नेता एस्मातुर मोमिनिन को राहत: मेघालय हाईकोर्ट ने दर्ज पांचों आपराधिक केस एक साथ जोड़ने के दिए निर्देश

मेघालय हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता और पूर्व विधायक एस जी एस्मातुर मोमिनिन के खिलाफ दर्ज पांच अलग-अलग आपराधिक मामलों को एक साथ जोड़कर जांच करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने पाया कि ये सभी मामले हाल ही में संपन्न गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (जीएचएडीसी) चुनावों के दौरान एक ही घटनाक्रम से उत्पन्न हुए थे।

मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे ने मोमिनिन द्वारा दायर याचिकाओं का निपटारा करते हुए पश्चिम गारो हिल्स के फुलबारी थाने में दर्ज चार प्राथमिकियों को तीन दिनों के भीतर अराइमाइल थाने में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया। आदेश के अनुसार वर्ष 2026 के मामला संख्या 10, 11, 12 और 13 को अराइमाइल थाने के मामला संख्या 19/2026 में विलय कर दिया जाएगा, जो कि 10 मार्च 2026 को दर्ज हुआ पहला मामला था।

मामले को एक साथ करने पर राज्य सरकार की सहमति

पूर्व विधायक के खिलाफ ये मामले चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में दर्ज किए गए थे। पुलिस ने इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और मेघालय सार्वजनिक व्यवस्था रखरखाव अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला कायम किया था।

अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त अधिवक्ता जनरल एन डी चुल्लाई ने एक ही वजह से दर्ज कई मामलों के कानूनी रुख पर कोई विरोध दर्ज नहीं कराया। उन्होंने बेंच को अवगत कराया कि सरकार फुलबारी के चारों मामलों को अराइमाइल ट्रांसफर कर पहली प्राथमिकी के साथ क्लब करने के लिए सहमत है।

रद्द कराने के लिए दोबारा याचिका दायर करने का विकल्प खुला

याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट की नज़ीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ही घटनाक्रम के लिए एक से अधिक एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकतीं। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि ये मामले मोमिनिन पर हुए कथित हमले और उसके बाद उनके सार्वजनिक भाषण की एक ही कड़ी से जुड़े हैं। इसके अलावा, पुलिस शिकायतें सीधे प्रत्यक्षदर्शियों के बजाय मुख्य रूप से मीडिया खबरों और प्रसारित वीडियो क्लिप्स पर आधारित थीं।

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राज्य सरकार की सहमति के बाद हाईकोर्ट ने माना कि अब याचिकाओं पर आगे सुनवाई का औचित्य नहीं रह जाता है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश डेरे ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मामलों का विलय पूरा होने के बाद यदि मोमिनिन चाहें, तो आपराधिक कार्यवाही को रद्द (क्वैश) कराने के लिए नई याचिका दायर करने का अधिकार उनके पास सुरक्षित रहेगा।

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