आवारा पशु प्रबंधन: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में सभी संस्थागत क्षेत्रों के जिलावार सर्वेक्षण के दिए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य भर के सभी ‘संस्थागत क्षेत्रों’ का जिलावार ब्योरा और सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ ने आवारा कुत्तों और मवेशियों के प्रबंधन से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट की हिदायतों पर अमल की निगरानी करते हुए एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर यह आदेश जारी किया।

संस्थागत परिसरों की पहचान के लिए कार्यात्मक परीक्षण का नियम

29 जुलाई के अपने आदेश में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग के माध्यम से निर्देश दिया है कि वह नगर निकायों के साथ मिलकर सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, खेल परिसरों, स्टेडियमों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसी सभी जगहों का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार करे। इस सूची में प्रत्येक संस्थान का नाम, सटीक स्थान, उसके प्रशासनिक प्रमुख और संबंधित स्थानीय निकाय का ब्योरा दर्ज करना अनिवार्य होगा।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि संस्थागत क्षेत्रों की पहचान केवल उनके नाम से नहीं होगी, बल्कि उनका ‘कार्यात्मक परीक्षण’ किया जाएगा। इसके तहत यह देखा जाएगा कि संबंधित परिसर में लोगों और आम जनता की कितनी आवाजाही रहती है, वहां बच्चे, बुजुर्ग, मरीज या पर्यटक जैसी संवेदनशील आबादी कितनी है और आवारा कुत्तों से सुरक्षा को कितना खतरा है। हाईकोर्ट ने रेखांकित किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सूचीबद्ध की गई श्रेणियों की सूची महज एक उदाहरण है और इसे सीमित नहीं माना जा सकता।

केंद्रीय संस्थानों और राजमार्गों के लिए विशेष नियम

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हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को भी उत्तर प्रदेश में स्थित अपने सभी परिसरों, जैसे विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, अस्पतालों, खेल परिसरों और रेलवे स्टेशनों की जिलावार सूची प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने ध्यान दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाले संस्थानों में इन निर्देशों को लागू करने की स्वतंत्र जिम्मेदारी केंद्र पर भी डाली है।

राजमार्गों पर आवारा मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए पीठ ने राज्य सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को निर्देश दिया है कि वे राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर संवेदनशील खंडों की पहचान करें। अधिकारियों को बताना होगा कि इन पशुओं को सुरक्षित रूप से कांजी हाउस या गौशालाओं में स्थानांतरित करने और उनके लिए भोजन, पानी तथा पशु चिकित्सा की क्या व्यवस्था की गई है।

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सार्वजनिक पार्कों का नियमन और अगली सुनवाई

इसके अलावा, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या मौजूदा नगर पालिका व राज्य कानूनों के तहत सार्वजनिक पार्कों, बच्चों के पार्कों, उद्यानों, खेल के मैदानों और अन्य मनोरंजक स्थलों में आवारा कुत्तों के प्रबंधन और नियंत्रण का प्रावधान संभव है।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) द्वारा प्रस्तुत सुप्रीम कोर्ट के 25 नवंबर 2025 और 19 मई 2026 के फैसलों के सार को रिकॉर्ड पर लिया। इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 13 अगस्त को तय की गई है।

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