हर्ष फायरिंग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख: 757 कारतूसों का हिसाब न देने पर शस्त्र लाइसेंस रद्द करने का फैसला बरकरार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि लाइसेंसी हथियारों का इस्तेमाल शादियों या धार्मिक त्योहारों में हर्ष फायरिंग के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि शस्त्र लाइसेंस पाना एक विशेषाधिकार है, जो कड़े कानूनी नियमों के अधीन है और हर लाइसेंसधारक का यह अनिवार्य दायित्व है कि वह खरीदे गए तथा इस्तेमाल किए गए कारतूसों का पूरा रिकॉर्ड रखे।

यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने 29 जुलाई को अखिलेश कुमार नाम के याचिकाकर्ता की याचिका खारिज करते हुए सुनाया। याचिकाकर्ता ने 757 कारतूसों का हिसाब न दे पाने पर निरस्त किए गए अपने शस्त्र लाइसेंस के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने लाइसेंसिंग अथॉरिटी और अपीलीय प्राधिकरण दोनों के फैसलों को सही ठहराया।

निरीक्षण के दौरान उजागर हुआ कारतूसों का अंतर

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मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता को वर्ष 2000 में शस्त्र लाइसेंस जारी किया गया था। वर्ष 2019 में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान उनसे कारतूसों के इस्तेमाल का ब्योरा मांगा गया। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, याचिकाकर्ता ने समय-समय पर कुल 857 कारतूस खरीदे थे, लेकिन जांच के दौरान वे केवल 57 जिंदा कारतूस और 33 खाली खोखे ही दिखा सके।

गायब 757 कारतूसों के संबंध में याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इनका उपयोग निशानेबाजी के अलावा शादी-विवाह, दुर्गा पूजा और छठ पूजा जैसे सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में हुआ था। उन्होंने यह तर्क भी दिया कि वर्ष 2000 में जब उनका लाइसेंस बना था, तब इस्तेमाल किए गए कारतूसों के खोखे संभालकर रखना अनिवार्य नहीं था।

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अदालत ने खारिज की याचिकाकर्ता की दलील

लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने इस स्पष्टीकरण और रिकॉर्ड की कमी को असंतोषजनक मानते हुए शस्त्र अधिनियम की धारा 17 के तहत लाइसेंस रद्द कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने पहले अपीलीय प्राधिकरण और बाद में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि शस्त्र अधिनियम और शस्त्र नियमों के प्रावधान यह साफ करते हैं कि नियामक शर्तें लाइसेंस का अभिन्न अंग होती हैं, जिन्हें 2016 के कानूनी ढांचे के तहत और सुदृढ़ किया गया था।

अदालत ने टिप्पणी की कि किसी भी लाइसेंसधारक को हर्ष फायरिंग के लिए शस्त्र के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस मामले में विवाह और धार्मिक त्योहारों के दौरान हथियार का दुरुपयोग किया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि 757 कारतूसों का ब्योरा न दे पाना हथियार के स्पष्ट दुरुपयोग को साबित करता है और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई पूरी तरह उचित है।

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