हाईकोर्ट का राज्य सरकार को कड़ा निर्देश: 15 दिनों में दें कर्मचारियों का पूरा बकाया डीए, विज्ञापनों पर लगाई रोक

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए अपने सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का बकाया महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) 15 दिनों के भीतर जारी करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ किया है कि जब तक कर्मचारियों का पूरा बकाया चुकता नहीं हो जाता, तब तक सरकार प्रिंट या सोशल मीडिया पर किसी भी तरह के बड़े विज्ञापन अभियानों या अनुत्पादक मदों पर पैसा खर्च नहीं कर सकती।

2 सप्ताह की मोहलत और ब्याज का कड़ा प्रावधान

कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार तथा पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की अपीलों को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। पीठ ने चेतावनी दी कि यदि दो सप्ताह की तय सीमा में भुगतान नहीं हुआ, तो सरकार को बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज दर से जुर्माना भरना होगा। हाईकोर्ट ने इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन कराने की जिम्मेदारी पंजाब के मुख्य सचिव को सौंपी है और उन्हें 31 अगस्त 2026 तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

READ ALSO  हाई कोर्ट ने वकीलों को जारी GST डिमांड नोटिस पर लगाई रोक- जानिए विस्तार से

वित्तीय तंगी का तर्क खारिज, विज्ञापनों पर तल्ख टिप्पणी

राज्य सरकार ने अदालत में वित्तीय तंगी का हवाला देते हुए 15,000 करोड़ रुपये से अधिक के बकाए का भुगतान करने में असमर्थता जताई थी। हालांकि, डिवीजन बेंच ने इस दलील को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक पटल पर उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि सरकार मुफ्त की योजनाओं, वित्तीय रियायतों और विज्ञापनों पर भारी धनराशि खर्च कर रही है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि विज्ञापनों और अनुत्पादक खर्चों की आड़ लेकर कर्मचारियों के वैध वेतन और पेंशन संबंधी अधिकारों को नहीं छीना जा सकता।

8 लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा सीधा फायदा

हाईकोर्ट के इस आदेश का सीधा लाभ राज्य के लगभग 8 लाख कार्यरत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा। फैसले के क्रियान्वयन से कर्मचारियों के मासिक वेतन में लगभग 10,000 रुपये से 15,000 रुपये तक की वृद्धि संभव है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य के कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों को अखिल भारतीय सेवाओं (आईएएस, आईपीएस और आईएफएस) तथा न्यायिक सेवा के अधिकारियों की तर्ज पर केंद्रीय पैटर्न के अनुरूप ही डीए और डीआर का भुगतान पाना अनिवार्य है।

मामले की पृष्ठभूमि और बकाया डीए का गणित

डिवीजन बेंच का यह निर्णय जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ के 8 अप्रैल के उस आदेश को बरकरार रखता है, जिसमें राज्य और पीएसपीसीएल को 30 जून तक 58 प्रतिशत डीए और बकाया जारी करने का निर्देश दिया गया था। वर्तमान में पंजाब सरकार केवल 42 प्रतिशत डीए का भुगतान कर रही है, जो केंद्रीय दर से 18 प्रतिशत कम है।

READ ALSO  दशकों बाद 'समय का पहिया पीछे नहीं घुमा सकती' सरकार, निर्दोष नागरिकों की जमीन पर दावा करना गलत: सुप्रीम कोर्ट

कर्मचारी यूनियनों के वकील सन्नी सिंगला के अनुसार, 1 जुलाई 2023 से डीए की किश्तें लंबित हैं। इसके अलावा अदालत ने 1 जनवरी 2016 से चले आ रहे लंबित बकाए को भी जारी करने का निर्देश दिया है। इससे पूर्व सरकार ने 75 वर्ष से कम आयु के पेंशनभोगियों को 5 वित्तीय वर्षों के दौरान 42 किश्तों में बिना ब्याज के भुगतान का प्रस्ताव रखा था, जिसे पीठ ने भेदभावपूर्ण करार देकर खारिज कर दिया।

पंजाब में जून 2021 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत केंद्रीय पैटर्न पर डीए देने की नीति बनाई थी, लेकिन बाद में इसे लागू नहीं किया गया। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने तर्क दिया कि उसने जून 2021 की रिपोर्ट स्वीकार नहीं की है और 18 फरवरी 2025 को एक नई योजना पेश की थी। सरकार ने यह भी दावा किया कि पंजाब अपने कर्मचारियों को अन्य राज्यों की तुलना में अधिक वेतन देता है, इसलिए अतिरिक्त डीए की जरूरत नहीं है। हालांकि, कर्मचारी संगठनों के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि महंगाई भत्ता कोई अनुग्रह राशि या बोनस नहीं, बल्कि कर्मचारी के वेतन का ही एक अभिन्न और अनिवार्य हिस्सा है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles