बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के अंकों में विसंगति का दावा करने वाली चार अभ्यर्थियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति एन बी सूर्यवंशी और न्यायमूर्ति ए डी शिंदे की खंडपीठ ने बिना किसी ठोस आधार के आरोप लगाने के लिए प्रत्येक याचिकाकर्ता पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के मूल्यांकन को पूरी तरह सही पाया।
मूल उत्तर पुस्तिकाओं का सत्यापन और याचिकाओं की वापसी
यह मामला याचिकाकर्ता हृचा देशपांडे, सोहम गावते, अथर्व जगताप और राहुल अरुणा नाग द्वारा दायर किया गया था। इन अभ्यर्थियों का आरोप था कि उनके आधिकारिक स्कोरकार्ड में दर्ज अंक उनके वास्तविक प्रदर्शन को नहीं दर्शाते हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने 23 जुलाई को एनटीए को अभ्यर्थियों की मूल ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (ओएमआर) उत्तर पुस्तिकाएं प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने सभी संबंधित पक्षों की उपस्थिति में मूल ओएमआर शीट का मिलान किया। जांच में पाया गया कि एनटीए द्वारा दिए गए अंक और उत्तर कुंजी का मिलान पूरी तरह सटीक था। भारत के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल अजय तल्हाड़ ने बताया कि जब हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार किया, तो दो अभ्यर्थियों ने अपनी याचिकाएं वापस लेने का विकल्प चुना।
पुनर्परीक्षा की पृष्ठभूमि
देश भर के मेडिकल कॉलेजों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट परीक्षा आयोजित की जाती है। याचिकाकर्ताओं द्वारा चुनौती दी गई यह परीक्षा जून में आयोजित की गई थी। इससे पहले मई में आयोजित हुई मुख्य परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने की खबरें सामने आई थीं, जिसके बाद एनटीए ने नए सिरे से पुनरीक्षा कराने का निर्णय लिया था।

