कोलकाता के एस्प्लेनेड क्षेत्र में नीट पेपर लीक मामले को लेकर 24 जुलाई को हुए वामपंथी छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को इस घटना की पुलिस जांच की प्रगति रिपोर्ट (स्टेटस रिपोर्ट) सौंपने का निर्देश दिया। जस्टिस कृष्णा राव की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त तय की है, जिस दिन राज्य सरकार को यह रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
प्रदर्शनों के नियमन की मांग
यह याचिका घटना के दौरान घायल हुए एक पत्रकार ने दायर की है। याचिकाकर्ता ने राज्य भर में सार्वजनिक रैलियों और प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए एक समान और अनिवार्य नियामक ढांचा तैयार करने के निर्देश देने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही, 24 जुलाई की हिंसा के जिम्मेदार असामाजिक तत्वों और समूहों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत जांच जारी रखने की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि वामपंथी छात्र संगठनों के प्रदर्शन में असामाजिक तत्व घुस आए थे, जिन्होंने हिंसा भड़काई। इसके चलते ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों और घटना को कवर कर रहे पत्रकारों को निशाना बनाया गया।
सुरक्षा व्यवस्था पर राज्य का पक्ष
याचिका में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि हिंसा के बाद पुलिस प्रशासन ने तेजी से कदम उठाते हुए स्थिति संभाली और राज्य सरकार ने घायल पत्रकारों को अस्पताल में भर्ती कराकर उनके इलाज की समुचित व्यवस्था की।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त अधिवक्ता जनरल बिल्वदल भट्टाचार्य ने कोर्ट में कहा कि सरकार आम नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है।

