केरल उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने गलत ब्रांड के ईयरबड्स डिलीवर करने और ग्राहक की शिकायत पर ध्यान न देने के मामले में गुरुग्राम स्थित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘वील बाजार’ (Vle Bazaar) पर 8,359 रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने कंपनी को उत्पाद की मूल कीमत 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने, मानसिक उत्पीड़न के एवज में मुआवजा देने और कानूनी खर्च का भुगतान करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के पालन के लिए 45 दिन की समय सीमा तय की गई है।
गलत डिलीवरी और ग्राहक सेवा की अनदेखी
यह विवाद संतोष कुमार नामक ग्राहक द्वारा की गई एक खरीदारी से शुरू हुआ था। उन्होंने 14 अप्रैल 2025 को ‘वील बाजार’ प्लेटफॉर्म से 359 रुपये का ऑनलाइन भुगतान करके पीले रंग के ‘वीकूल मूनवॉक मिनी ईयरबड्स’ का ऑर्डर दिया था। यह उत्पाद डिजिटल बैटरी इंडिकेटर और मैग्नेटिक चार्जिंग केस की विशेषताओं के साथ आता था। हालांकि, 30 अप्रैल 2025 को जब पार्सल पहुंचा, तो उसमें वीकूल की जगह ‘बोट’ (boAT) कंपनी के ईयरबड्स निकले।
सामान मिलते ही ग्राहक ने तुरंत प्लेटफॉर्म की ग्राहक सेवा से संपर्क किया। उन्हें गलत उत्पाद की तस्वीरें ईमेल द्वारा भेजने का निर्देश दिया गया। संतोष कुमार ने मांगी गई जानकारी भेज दी और इसके बाद कई बार कंपनी से फॉलो-अप करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। कंपनी ने न तो गलत सामान वापस मंगाया और न ही पैसे रिफंड किए। इसके बाद पीड़ित ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए आयोग का रुख किया।
सुनवाई से अनुपस्थिति को माना आरोपों की स्वीकृति
इस मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष डी बी बीनु तथा सदस्य रामचंद्रन वी और श्रीविध्या टी एन की पीठ ने की। आधिकारिक नोटिस मिलने के बावजूद ‘वील बाजार’ का कोई भी प्रतिनिधि सुनवाई में शामिल नहीं हुआ और न ही कंपनी की ओर से कोई लिखित जवाब दाखिल किया गया।
14 जुलाई के अपने आदेश में आयोग ने टिप्पणी की कि नोटिस पाने के बाद भी कंपनी का प्रक्रिया में भाग न लेना यह दर्शाता है कि उसके पास आरोपों के खिलाफ कहने के लिए कुछ नहीं है। कानून की नज़र में इसे शिकायतकर्ता के दावों की मौन स्वीकृति माना गया। पीठ ने ग्राहक के बयानों को पूरी तरह विश्वसनीय माना और कहा कि गलत उत्पाद डिलीवर करना और उसे वापस लेने से इनकार करना स्पष्ट रूप से सेवा में कोताही है।
मुआवजे और भुगतान का विवरण
आयोग ने गुरुग्राम स्थित इस ऑनलाइन विक्रेता को निर्देश दिया है कि वह ग्राहक द्वारा चुकाए गए 359 रुपये पर ऑर्डर की तारीख से लेकर रकम की अदायगी तक 9 प्रतिशत सालाना ब्याज जोड़कर लौटाए। इसके अतिरिक्त, ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी के मुआवजे के तौर पर 5,000 रुपये और कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में 3,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश भी दिया गया है। आयोग ने इस पूरे फैसले पर अमल करने के लिए कंपनी को 45 दिनों की मोहलत दी है।

