हैदराबाद में नया एयर कंडीशनर (एसी) खरीदने के बाद भी उसके लगातार खराब रहने और बार-बार शिकायत के बावजूद समाधान न करने के मामले में तेलंगाना के एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रिलायंस रिटेल लिमिटेड को सेवा में लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को ग्राहक को 60,431 रुपये का पूरा रिफंड 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने और 20,000 रुपये का मुआवजा व कानूनी खर्च देने का निर्देश दिया है।
शिकायत की अनदेखी और लापरवाही
रंगा रेड्डी जिले के 50 वर्षीय निवासी राघवेन्द्र कालिगा ने 29 अप्रैल 2024 को हैदराबाद स्थित रिलायंस रिटेल स्टोर से 60,431 रुपये में लॉयड ब्रांड का 2.2 टन का एसी खरीदा था। 1 मई 2024 को एसी का इंस्टालेशन हुआ, लेकिन अगले ही दिन इसके इनडोर यूनिट से पानी का रिसाव शुरू हो गया।
तकनीशियन ने रिसाव को ठीक किया, लेकिन महज दो घंटे बाद एसी ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया। 5 मई 2024 को जब कंपनी के कर्मचारियों ने दोबारा जांच की, तो पता चला कि एसी का मदरबोर्ड खराब हो चुका है और उसे बदलना पड़ेगा।
स्टोर स्तर पर कोई सहायता न मिलने पर कालिगा ने मुंबई स्थित रिलायंस की सर्विस टीम से संपर्क किया। 8 मई, 9 मई और 10 मई 2024 को लगातार ईमेल भेजने के बाद भी न तो मदरबोर्ड बदला गया और न ही कंपनी की ओर से कोई जवाब आया। इसके बाद पीड़ित ग्राहक ने स्वयं आयोग के समक्ष उपस्थित होकर रिपेयर के बजाय पूरा रिफंड दिलाने की मांग की।
45 दिनों के भीतर भुगतान का निर्देश
आयोग की अध्यक्ष चित्तेनि लता कुमारी और सदस्य कात्यायनी खांडविल्ली की पीठ ने अपने 7 जुलाई के आदेश में कहा कि ग्राहक द्वारा बार-बार ईमेल भेजे जाने के बावजूद रिलायंस रिटेल ने न तो कोई जवाब दिया और न ही समस्या का समाधान किया। आयोग के अनुसार प्राथमिकता पर समाधान का आश्वासन देकर चुप्पी साध लेना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सेवा में गंभीर कमी और लापरवाही को दर्शाता है।
आयोग ने टिप्पणी की कि कोई भी ग्राहक नया एसी खरीदने के 15 दिनों के भीतर इस तरह की खराबी की उम्मीद नहीं करता। आयोग ने यह भी नोट किया कि आदेश आने तक शिकायतकर्ता तीन वर्षों के लिए एक नए एसी के उपयोग से वंचित रहा।
आयोग ने रिलायंस रिटेल को 29 अप्रैल 2024 से भुगतान होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 60,431 रुपये की पूरी राशि वापस करने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 10,000 रुपये का मुआवजा और 10,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में देने को कहा है। कंपनी को इस आदेश का पालन करने के लिए 45 दिनों का समय दिया गया है। तय समय सीमा में भुगतान न करने पर ब्याज दर बढ़कर 12 प्रतिशत प्रतिवर्ष हो जाएगी। रिफंड की पूरी राशि मिलने पर ग्राहक को एसी कंपनी को वापस करना होगा।
कंपनी का पक्ष और आयोग का निष्कर्ष
मामले में रिलायंस रिटेल के अधिवक्ता पी. श्रीनिवास रेड्डी आयोग के समक्ष उपस्थित हुए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा में लिखित जवाब दाखिल न करने के कारण कंपनी को 9 दिसंबर 2024 को एकपक्षीय (ex parte) घोषित कर दिया गया था।
बाद में दाखिल लिखित तर्कों में कंपनी ने दावा किया कि उसने कमियों को दुरुस्त कर दिया था। कंपनी का तर्क था कि ग्राहक ने ऐसा कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जिससे यह सिद्ध हो कि केस दर्ज करने से पहले एसी सही ढंग से काम कर रहा था। कंपनी ने यह भी कहा कि 7 मई 2024 को ग्राहक सेवा प्रमुख ने ईमेल पर इनवॉइस की प्रति मांगी थी, जिसे प्राप्त करने के बाद असुविधा के लिए खेद जताते हुए प्राथमिकता के आधार पर समाधान का आश्वासन दिया गया था।
आयोग ने कंपनी के इन तर्कों को खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि इनवॉइस प्राप्त होने और प्राथमिकता का वादा करने के बावजूद कोई कदम न उठाना लापरवाही है। यह फैसला रेखांकित करता है कि केवल प्राथमिकता पर कार्रवाई का वादा करके कंपनियां अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं।

