अपार आईडी: बच्चों का आधार डेटा साझा करने से इनकार कर सकेंगे माता-पिता, सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में लागू किया नियम

देशभर के माता-पिता अब ‘ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री’ (APAAR) योजना के तहत अपने बच्चों की आधार जानकारी साझा करने से इनकार कर सकते हैं या पहले से दी गई सहमति को वापस ले सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और योजना को लागू करने वाली सभी प्रशासनिक संस्थाओं को पूरे देश में इस सुरक्षात्मक कदम को लागू करने का आदेश दिया है।

चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने निर्देश दिया है कि अपार योजना के मानक सहमति फॉर्म में संशोधन किया जाए ताकि अभिभावकों को स्पष्ट रूप से सहमति रोकने या अस्वीकार करने का विकल्प मिल सके। 20 जुलाई को पारित यह आदेश शनिवार को सार्वजनिक किया गया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस शैक्षणिक योजना के तहत एकत्र की गई किसी भी व्यक्तिगत जानकारी को कानून द्वारा अधिकृत किए बिना किसी भी निजी संस्था या तीसरे पक्ष के साथ साझा नहीं किया जा सकता।

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उड़ीसा हाईकोर्ट के फैसले को बनाया आधार

शीर्ष अदालत ने ‘रोहित आनंद दास बनाम ओडिशा राज्य’ मामले में उड़ीसा हाईकोर्ट द्वारा 12 दिसंबर 2025 को दिए गए फैसले के मिसाल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया है। हाईकोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 19 में राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि वे सहमति फॉर्म में संशोधन कर ऑप्ट-आउट और इनकार का विकल्प जोड़ें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सहमति को अर्थपूर्ण और सूचित बनाने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।

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यह आदेश उन याचिकाओं पर आया है जिनमें अभिभावकों ने अपार प्रणाली की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह योजना बच्चों की लंबी अवधि तक ट्रैकिंग, प्रोफाइलिंग और निगरानी की सुविधा देकर शिक्षा क्षेत्र में एक सरकारी निगरानी तंत्र की तरह काम करती है। उन्होंने डेटा को लंबे समय तक अपने पास रखने और शैक्षणिक क्षेत्र से बाहर इसके संभावित दुरुपयोग पर चिंता जताई थी।

डेटा सुरक्षा कानूनों का पालन अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने स्वेच्छा से नामांकन कराने वालों के डेटा दुरुपयोग की आशंकाओं को बेबुनियाद बताया। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी प्रशासनिक योजना के तहत डेटा संग्रह करने मात्र से सरकारी प्राधिकारी डेटा सुरक्षा के अपने कर्तव्यों से मुक्त नहीं हो जाते।

अदालत ने आदेश दिया कि अपार योजना के तहत व्यक्तिगत डेटा का संग्रहण, भंडारण, प्रसंस्करण और साझाकरण डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के तहत ही होना चाहिए। इस कानून के तहत जिम्मेदार संस्थाएं छात्रों के डेटा को सुरक्षित, वैध और केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए संसाधित करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं।

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