आपराधिक इतिहास न होने और लंबी हिरासत का हवाला देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चोरी के आरोपी को दी नियमित जमानत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने घर में घुसकर चोरी करने के आरोपी 23 वर्षीय युवक को नियमित जमानत दे दी है। जस्टिस रमेश सिन्हा की पीठ ने जमानत याचिका स्वीकार करते हुए ध्यान दिया कि आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है, उसके पास से चोरी की कोई संपत्ति जब्त नहीं हुई है और वह फरवरी 2026 से जेल में बंद है, जबकि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में समय लगने की संभावना है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला रायपुर जिले के थाना डी.डी. नगर में दर्ज अपराध संख्या 591/2025 से जुड़ा है। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि अज्ञात व्यक्तियों ने उसके घर में अवैध रूप से प्रवेश कर सोने-चांदी के गहने चोरी कर लिए।

अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और बाद में आर.डी.ए. कॉलोनी, इंद्रप्रस्थ, रायपुर निवासी सागर श्रीवास को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 331 (4), 305 (ए) और 3 (5) के तहत अपराध दर्ज किया गया। आरोपी को 16 फरवरी 2026 को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, जिसके बाद उसने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) की धारा 483 के तहत जमानत याचिका दायर की थी।

पक्षों की दलीलें

आवेदक की ओर से पेश वकील सी.आर. साहू ने तर्क दिया कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चोरी का कोई सामान या आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं की है। गिरफ्तारी केवल संदेह के आधार पर और अन्य सह-आरोपियों के मेमोरेंडम बयानों के आधार पर की गई है। वकील ने यह भी रेखांकित किया कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, वह 16 फरवरी 2026 से जेल में है और विचारण पूरा होने में लंबा समय लगने की संभावना है।

दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से उपस्थित पैनल वकील पलक द्विवेदी ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि आरोपी अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर चोरी की घटना में सक्रिय रूप से शामिल था, इसलिए वह जमानत पाने का हकदार नहीं है।

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हाईकोर्ट का विश्लेषण और टिप्पणियां

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी के पक्ष में अपने न्यायिक विवेक का प्रयोग किया।

मामले की समग्र परिस्थितियों पर विचार करते हुए अदालत ने टिप्पणी की:

“मामले के तथ्यों और परिस्थितियों, आरोपों की प्रकृति और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि आवेदक का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, आवेदक 16.02.2026 से जेल में है और मुकदमे की समाप्ति में कुछ समय लगने की संभावना है, इसलिए मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना, मैं इस याचिका को स्वीकार करने का इच्छुक हूं।”

अदालत का निर्णय और शर्तें

हाईकोर्ट ने जमानत याचिका मंजूर करते हुए निर्देश दिया कि आरोपी सागर श्रीवास को निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार एक व्यक्तिगत बंधपत्र (पर्सनल बॉन्ड) और उतनी ही राशि की दो जमानतें प्रस्तुत करने पर रिहा किया जाए।

मुकदमे के दौरान उचित अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने रिहाई पर निम्नलिखित शर्तें भी लगाई हैं:

  1. आवेदक को एक वचन पत्र प्रस्तुत करना होगा कि गवाहों की उपस्थिति के दौरान वह साक्ष्य की तिथियों पर कोई स्थगन नहीं मांगेगा। इस शर्त का उल्लंघन करने पर निचली अदालत इसे जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग मानकर कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है।
  2. आवेदक को व्यक्तिगत रूप से या अपने वकील के माध्यम से प्रत्येक तय तिथि पर निचली अदालत के समक्ष उपस्थित रहना होगा। बिना पर्याप्त कारण के अनुपस्थित रहने पर निचली अदालत भारतीय न्याय संहिता की धारा 269 के तहत कार्रवाई कर सकती है।
  3. यदि आरोपी जमानत का दुरुपयोग करता है और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बीएनएसएस की धारा 84 के तहत उद्घोषणा जारी की जाती है, और वह तय तिथि पर उपस्थित होने में विफल रहता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 209 के तहत कार्यवाही शुरू की जाएगी।
  4. मामला खोलने, आरोप तय करने और बीएनएसएस की धारा 351 के तहत बयान दर्ज करने की तिथियों पर आरोपी को स्वयं उपस्थित रहना होगा। यदि अनुपस्थिति जानबूझकर पाई जाती है, तो अदालत इसे जमानत का दुरुपयोग मानते हुए कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
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मामले का विवरण

मामले का शीर्षक: सागर श्रीवास बनाम छत्तीसगढ़ राज्य

वाद संख्या: एमसीआरसी संख्या 5831/2026

पीठ: चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा

निर्णय की तिथि: 23 जुलाई 2026

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