जीएसटी चोरी मामला: चीनी दूतावास के इनकार के बाद अटकी थी रिहाई, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चीनी महिला की जमानत शर्तों में दी ढील

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जीएसटी चोरी के मामले में आरोपी एक चीनी महिला को राहत देते हुए उसकी जमानत की शर्तों में संशोधन किया है। चीनी दूतावास द्वारा कोर्ट में उपस्थिति का गारंटी प्रमाण पत्र देने से मना किए जाने के कारण यह महिला जमानत मिलने के बावजूद करीब पांच महीने से जेल में बंद थी। जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने 14 जुलाई को इस संबंध में आदेश पारित करते हुए दूतावास के प्रमाण पत्र से जुड़ी शर्त को हटा दिया, जिससे आरोपी की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

दूतावास के इनकार के कारण बढ़ी जेल की मियाद

मामले के विवरण के अनुसार, आरोपी एलिस ली उर्फ ली तेंगली को हाईकोर्ट ने 9 फरवरी को जमानत दे दी थी। हालांकि, रिहाई के लिए अदालत ने शर्त रखी थी कि उन्हें चीनी दूतावास से एक पत्र प्रस्तुत करना होगा, जो ट्रायल कोर्ट को मुकदमे के दौरान उनकी उपस्थिति का आश्वासन दे। जब ली ने दूतावास से संपर्क किया, तो वाणिज्य दूतावास अधिकारियों ने यह अनुरोध खारिज कर दिया। दूतावास का कहना था कि ऐसा गारंटी प्रमाण पत्र जारी करना उनके आधिकारिक कार्यों और कांसुलर अधिकारों के दायरे में नहीं आता है। इस शर्त को पूरा न कर पाने के कारण जमानत मिलने के बाद भी उन्हें लगातार हिरासत में रहना पड़ा।

वीजा पाबंदियों से खत्म हुई देश छोड़ने की गुंजाइश

संशोधन अर्जी पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO), दिल्ली से प्राप्त रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी। इसके अनुसार, ली को 28 अक्टूबर 2026 तक वैध ‘एक्स-मिस’ (X-Misc.) वीजा जारी किया गया है। इस वीजा पर स्पष्ट रूप से दर्ज है कि ‘एग्जिट परमिट के बिना भारत छोड़ने की अनुमति नहीं है’। यह विशेष श्रेणी का वीजा उन विदेशी नागरिकों को दिया जाता है जो भारत में आपराधिक मामलों में आरोपी हैं और जमानत मिलने के बाद उन्हें अदालती कार्यवाही के लिए देश में मौजूद रहना जरूरी होता है।

हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत अंडरटेकिंग जमा करने का दिया निर्देश

इमिग्रेशन पाबंदियों और वीजा की शर्तों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने चीनी दूतावास से गारंटी प्रमाण पत्र लाने की अनिवार्यता समाप्त कर दी। संशोधित आदेश के तहत अब ली को संबंधित ट्रायल कोर्ट में केवल एक व्यक्तिगत अंडरटेकिंग जमा करनी होगी। इसमें उन्हें वचन देना होगा कि वह मुकदमे की प्रत्येक सुनवाई पर अनिवार्य रूप से उपस्थित होंगी और केस के जल्द निपटारे के लिए अदालती कार्यवाही में पूरा सहयोग करेंगी।

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