आईफोन के डिब्बे में भेजा दाढ़ी का तेल: फ्लिपकार्ट पर 70 हजार रुपये का जुर्माना, पूरा रिफंड देने का आदेश

मुंबई के एक उपभोक्ता आयोग ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट और एक विक्रेता को सेवा में लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराया है। आयोग ने आईफोन की जगह दाढ़ी बढ़ाने का तेल भेजने के मामले में कंपनी और विक्रेता पर 70,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही पीड़ित ग्राहक को आईफोन की पूरी कीमत 1.11 लाख रुपये ब्याज सहित वापस करने का निर्देश दिया है।

ई-कॉमर्स कंपनियां जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं

7 जुलाई को जारी अपने फैसले में मुंबई जिला उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग ने स्पष्ट किया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म किसी सामान की बिक्री करने और ग्राहक द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते। आयोग के अध्यक्ष प्रदीप काडू और सदस्य गौरी कापसे की पीठ ने पाया कि फ्लिपकार्ट और संबंधित विक्रेता ने ग्राहक को सही उत्पाद न देकर और उसकी शिकायत का समाधान न करके सेवा में गंभीर कमी की है।

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बिल आईफोन का, पार्सल में निकला तेल

यह मामला मुंबई के पवई निवासी एक ग्राहक से जुड़ा है। उन्होंने 22 अप्रैल 2023 को फ्लिपकार्ट से 1.11 लाख रुपये में आईफोन 14 प्रो, चार्जर और फोन कवर का ऑर्डर दिया था। डिलीवरी मिलने के बाद जब पार्सल खोला गया तो उसमें आईफोन की जगह दाढ़ी बढ़ाने के तेल की बोतल निकली। हालांकि, पार्सल के साथ भेजे गए बिल में स्पष्ट रूप से आईफोन 14 प्रो ही दर्ज था।

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महीने भर की अनदेखी और टालमटोल

सामान गलत मिलने पर ग्राहक ने तुरंत फ्लिपकार्ट कस्टमर सपोर्ट से संपर्क किया और बिल का प्रमाण सौंपा। इसके बावजूद, एक महीने से भी अधिक समय तक बार-बार संपर्क करने पर भी कंपनी ने न तो फोन बदला और न ही पैसे वापस किए। बाद में फ्लिपकार्ट ने बिना कोई समाधान दिए शिकायत को ‘सुलझा हुआ’ (Resolved) घोषित कर दिया। कंपनी ने यह तर्क देते हुए शिकायत खारिज कर दी कि ग्राहक ने 48 घंटे के भीतर वैध प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया था।

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पूरा रिफंड और मुआवजे का आदेश

आयोग ने अपने अवलोकन में कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में पूरी तरह सफल रहा है कि विपक्षियों ने ऑर्डर किया गया सामान नहीं पहुंचाया और लगातार शिकायतों के बाद भी समस्या का निवारण नहीं किया। इस आधार पर आयोग ने फ्लिपकार्ट और विक्रेता को निर्देश दिया कि वे ग्राहक को 1.11 लाख रुपये की पूरी राशि उचित ब्याज के साथ लौटाएं और 70,000 रुपये का मुआवजा प्रदान करें।

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