तत्काल रेल टिकट बुकिंग में आधार ओटीपी अनिवार्य: केरल हाईकोर्ट ने रेलवे के नियम पर लगाई मुहर, पैन कार्ड को विकल्प बनाने का सुझाव

केरल हाईकोर्ट ने ऑनलाइन तत्काल रेल टिकट बुकिंग के लिए आधार-आधारित ओटीपी सत्यापन की अनिवार्यता को सही ठहराया है। अदालत ने इस नीति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह कदम धोखाधड़ी, टिकटों की कालाबाजारी और स्वचालित सॉफ्टवेयर के जरिए होने वाली थोक बुकिंग को रोकने के लिए कानूनी रूप से न्यायसंगत और जरूरी है। इसके साथ ही अदालत ने भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) को सुझाव दिया है कि वह सत्यापन के लिए पैन कार्ड को भी वैकल्पिक पहचान पत्र के रूप में शामिल करने पर विचार करे।

मुख्य न्यायाधीश की पीठ का निर्णय

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वीएम की खंडपीठ ने 22 जुलाई को पारित आदेश में कहा कि आईआरसीटीसी पोर्टल पर आधार सत्यापन की अनिवार्यता अतीत में सामने आई धोखाधड़ी और अवैध गतिविधियों के अनुभवों पर आधारित है। अदालत के अनुसार, अनुपातिकता की कसौटी पर भी रेलवे का यह निर्णय पूरी तरह खरा उतरता है।

जून 2025 की अधिसूचना को दी गई थी चुनौती

यह मामला त्रिशूर निवासी बहादुर शाह अनक्कोट नासिरली द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें रेल मंत्रालय की 10 जून 2025 की अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता के वकील एस प्रसाद ने तर्क दिया था कि आईआरसीटीसी पोर्टल और ऐप पर आधार सत्यापन की बाध्यता से नागरिकों की निजता और सूचनात्मक स्वायत्तता के अधिकार का हनन होता है। याचिका में यह भी कहा गया था कि यह कदम तत्काल प्रणाली की तकनीकी कमियों को सुधारे बिना लागू किया गया है और 10 जून से पहले ऐसी कोई शर्त मौजूद नहीं थी।

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पैन कार्ड को विकल्प बनाने की सिफारिश

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस तर्क में पर्याप्त आधार पाया कि पैन कार्ड के जरिए भी सत्यापन का वही उद्देश्य हासिल किया जा सकता है। अदालत ने उल्लेख किया कि पैन से जुड़े लेनदेन में भी ओटीपी सत्यापन की प्रक्रिया होती है, इसलिए आईआरसीटीसी को उपयोगकर्ताओं को आधार या पैन कार्ड में से किसी एक को चुनने की सुविधा देने पर विचार करना चाहिए।

रेलवे और आईआरसीटीसी का पक्ष

रेलवे और आईआरसीटीसी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पी श्रीकुमार ने अदालत को बताया कि इस नीति का मकसद केवल वास्तविक यात्रियों को तत्काल टिकट उपलब्ध कराना और दलालों, सिंडिकेट व ऑटोमेटेड बॉट्स को रोकना है।

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आईआरसीटीसी द्वारा 1 अप्रैल को दाखिल हलफनामा में स्पष्ट किया गया था कि आधार सत्यापन का उद्देश्य सर्वर की क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि फर्जी खातों और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर के कारण पैदा होने वाली कृत्रिम भीड़ को नियंत्रित करना है।

डेटा सुरक्षा का दिया भरोसा

आईआरसीटीसी ने अदालत में स्पष्ट किया कि यात्रियों की निजी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है। सत्यापन प्रक्रिया उपयोगकर्ता की स्पष्ट सहमति से एन्क्रिप्टेड नेटवर्क के माध्यम से होती है और यह केवल एक बार का सेट-अप है। रेलवे या आईआरसीटीसी किसी का आधार नंबर स्टोर नहीं करता और उन्हें सिस्टम से केवल पुष्टि का उत्तर प्राप्त होता है। इसके अलावा, जो यात्री आधार सत्यापन नहीं कराना चाहते, वे बिना किसी परेशानी के रेलवे आरक्षण काउंटरों से सीधे तत्काल टिकट ले सकते हैं।

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