देहरादून में आशारोड़ी से झाझरा के बीच प्रस्तावित सड़क परियोजना के लिए लगभग 7,000 पेड़ों की कटाई के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रुख कड़ा किया है। हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र और उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को इस मामले में सुनवाई की। अदालत ने याचिकाकर्ता को सरकारों के जवाब पर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब पांच हफ्ते बाद होगी।
जैव विविधता नियमों के उल्लंघन का आरोप
देहरादून की सामाजिक कार्यकर्ता रेनू पॉल द्वारा दायर इस याचिका में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ‘गति शक्ति ग्रीन प्रोजेक्ट’ के तहत यमुना घाटी क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क निर्माण को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि इस परियोजना को शुरू करने से पहले पर्यावरण कानूनों के तहत अनिवार्य जैव विविधता मंजूरी नहीं ली गई, जो कानूनी नियमों का सीधा उल्लंघन है।
पर्यावरण और वन्यजीवों पर गंभीर खतरे की चेतावनी
याचिका में आशंका जताई गई है कि इतने व्यापक पैमाने पर वनों की कटाई से दून घाटी के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी। यह वन क्षेत्र 300 से अधिक पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है और हाथियों की आवाजाही के लिए एक महत्वपूर्ण बफर जोन का काम करता है।
इसके साथ ही, याचिका में क्षेत्र के प्रसिद्ध आसन बैराज का भी उल्लेख किया गया है, जहां हर साल दुनिया के विभिन्न हिस्सों से हजारों प्रवासी पक्षी आते हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि पेड़ों के कटने से वन्यजीवों के आश्रय स्थल नष्ट हो जाएंगे, प्राकृतिक जल स्रोतों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और पूरे क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा।

