मध्य प्रदेश के धार में स्थित विवादित भोजशाला परिसर के पास जुमे की नमाज के लिए आवंटित वैकल्पिक स्थल को लेकर उठी आपत्तियों पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने राज्य सरकार से इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने को कहा है कि क्या नमाज के लिए विवादित परिसर से बिल्कुल सटा हुआ स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है।
दूरी को लेकर पक्षों में मतभेद
मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्रशासन को भोजशाला परिसर के निकट एक खुला स्थान देने का निर्देश दिया था। इसके विपरीत, स्थानीय अधिकारियों द्वारा आवंटित जमीन परिसर से लगभग 2 किलोमीटर दूर है। अहमदी ने बताया कि इस अधिक दूरी के कारण नमाजी पहले ही जुमे की नमाज पढ़ने से वंचित हो चुके हैं।
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश सरकार की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस दावे का प्रतिवाद करते हुए कहा कि निर्धारित किया गया वैकल्पिक स्थल विवादित परिसर से महज 900 मीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद, उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि वे स्वयं इस स्थिति की समीक्षा करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर उचित कदम उठाएंगे। मेहता ने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखकर इसमें आवश्यक सुधार करेंगे।
अदालत के आदेश का पालन अनिवार्य
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने रेखांकित किया कि अदालत के पिछले निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाना आवश्यक है। इसके पश्चात पीठ ने मामले को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिया कि वे राज्य सरकार से परिसर से बिल्कुल पास का स्थान उपलब्ध कराने के विषय में नए निर्देश प्राप्त करें।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए एक अंतरिम निर्देश से संबंधित है। यह निर्देश मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई के दौरान आया था, जिसमें भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया गया था। इस मामले में अंतिम निर्णय आने तक, शीर्ष अदालत ने राज्य प्रशासन को आदेश दिया था कि वह नमाजियों को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए विवादित स्थल के पास ही एक अलग खुला स्थान उपलब्ध कराए।

