लखनऊ जिला अदालत में वकीलों से मारपीट और मुवक्किल को पीटने के मामले में सख्त हुआ हाईकोर्ट, पुलिस सुरक्षा देने और रिपोर्ट तलब करने का दिया निर्देश

लखनऊ जिला अदालत परिसर में दिल्ली के अधिवक्ताओं के साथ बदसलूकी, धमकी देने और उनके मुवक्किल की बेरहमी से पिटाई किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। शाम 7:00 बजे बुलाई गई एक आपातकालीन सुनवाई में जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मनजीव शुक्ला की खंडपीठ ने जनहित को सर्वोपरि मानते हुए प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं को दरकिनार कर दिया। हाईकोर्ट ने पीड़ित अधिवक्ताओं को तत्काल पुलिस सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं और लखनऊ के जिला जज तथा पुलिस आयुक्त को विस्तृत जांच रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला एक दीवानी जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। दायर आवेदन के अनुसार, वादी पक्ष ने शुरुआत में विवादित संपत्ति को लेकर रियाजुद्दीन नाम के व्यक्ति के खिलाफ घोषणा और निषेधाज्ञा का मुकदमा दायर किया था। इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान वकील सौरभ कुमार वर्मा, रियाजुद्दीन के अधिवक्ता के रूप में पेश हुए। आरोप है कि मुकदमे के लंबित रहने के दौरान ही रियाजुद्दीन ने वह संपत्ति अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा के नाम हस्तांतरित कर दी।

इसके बाद, वादियों ने दूसरा मुकदमा (वाद संख्या 2933/2025 – मोहम्मद शाकिर बनाम सौरभ वर्मा) दायर किया, जिसमें अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा को प्रतिवादी संख्या 1 बनाया गया। हालांकि इस मुकदमे में शुरुआत में वादियों के पक्ष में अंतरिम स्थगादेश दिया गया था, लेकिन जनवरी 2026 में वादियों की बिना किसी अनुमति के इसे रद्द करवा दिया गया और उनके नाम पर हाईकोर्ट में दाखिल की गई अपील भी खारिज हो गई।

अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा और उनके सहयोगियों के प्रभाव और दबदबे के कारण लखनऊ का कोई भी स्थानीय वकील इस मुकदमे में वादी का पक्ष लेने को तैयार नहीं था। मजबूर होकर वादियों ने दिल्ली में वकालत करने वाली अधिवक्ता अभिपसा मोहंती, कोमल अग्रवाल और आशुतोष श्रीवास्तव को अपना वकालतनामा दाखिल करने के लिए नियुक्त किया। इससे पहले भी 30 अप्रैल 2026 को एक अन्य वादी आसिफ के साथ मारपीट की गई थी। वजीरगंज थाने में एफआईआर दर्ज न होने पर इसकी शिकायत पुलिस कमिश्नरेट की विशेष सेल से की गई थी।

जिला अदालत में घटनाक्रम

21 जुलाई 2026 को दिल्ली के तीनों अधिवक्ता सिविल जज (सीनियर डिवीजन) सुश्री नेहा गंगवार की अदालत में सूचीबद्ध मुकदमे में अपना वकालतनामा दाखिल करने लखनऊ जिला अदालत पहुंचे। कोर्ट खाली होने के कारण अति-आवश्यकता का उल्लेख करने पर मामले को कोर्ट संख्या 41 में सुनवाई के लिए तय किया गया।

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जिला अदालत के ज्ञान नामक एक कर्मचारी ने वकीलों से कहा कि नया वकालतनामा दाखिल होने के कारण वादी की पहचान और सत्यापन के लिए उसे स्वयं आना होगा और आधार कार्ड दिखाना होगा। वकीलों के बुलाने पर वादी संख्या 1 मोहम्मद शाकिर अदालत परिसर में पहुंचे।

आरोप है कि तभी अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा और उनके सहयोगियों ने दिल्ली के वकीलों को रोका और अदालत में प्रवेश करने से रोक दिया। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ताओं से बदसलूकी की और वादी मोहम्मद शाकिर को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। हमलावर वादी को बरामदे की तरफ घसीटते हुए लगातार पीटते रहे और चिल्लाते रहे, “वकील के खिलाफ केस करेगा तू”

जब दिल्ली के वकीलों ने अपने मुवक्किल को बचाने का प्रयास किया, तो अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव के पेट और छाती पर मुक्के मारे गए। अपनी जान बचाकर वकील कोर्ट संख्या 41 के जज के चैंबर की ओर भागे। जब उन्होंने जिला जज के समक्ष इस बात का उल्लेख करने के लिए उस मंजिल से जाने की कोशिश की, तो अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा ने उन पर चिल्लाना शुरू कर दिया और अपनी महिला सहयोगियों को उन पर हमला करने के लिए उकसाया। जब अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव ने बातचीत करनी चाही, तो उन्हें धमकी देते हुए कहा गया, “तुम मेरे खिलाफ कैसे केस ले लिए” और “तुम इसमें मत पड़ो वरना अच्छा नहीं होगा”। वादी मोहम्मद शाकिर को इतना पीटा गया कि वह खून से लथपथ हो गया, जिसके बाद वकीलों को सीढ़ियों से भागकर अपनी जान बचानी पड़ी।

हाईकोर्ट का विश्लेषण और टिप्पणियां

विशेष सुनवाई के दौरान उपस्थित अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट के समक्ष एक वीडियो चलाया, जिसमें अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा और अन्य लोग वादी मोहम्मद शाकिर की पिटाई करते हुए दिखाई दे रहे थे। अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव ने पीठ को बताया कि सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के पदाधिकारी बताए जा रहे सौरभ कुमार वर्मा के खिलाफ पहले से कम से कम तीन आपराधिक मामले लंबित हैं।

पूरे मामले की समीक्षा करते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि “यदि जैसी घटना का आरोप लगाया गया है वैसी घटी है, जो हमारे सामने चलाए गए वीडियो और अधिवक्ताओं के बयानों के आधार पर प्रथम दृष्टया घटी हुई प्रतीत होती है, तो यह बहुत गंभीर मामला है।”

कोर्ट ने कहा कि लखनऊ जिला अदालत में ऐसी घटनाएं पहली बार नहीं हुई हैं। इससे पहले भी जनहित याचिका संख्या 32524/2018 सहित कई मामलों में संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के तहत एक विशेष सेल का गठन कराया था, ताकि वकालत के नाम पर जमीन कब्जे और न्यायिक कार्यों में व्यवधान डालने वाले तत्वों की जांच की जा सके। पीठ ने जोर देकर कहा कि यह मामला न केवल अपराध की श्रेणी में आता है, बल्कि न्याय व्यवस्था में सीधा हस्तक्षेप भी है।

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सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े लखनऊ के पुलिस आयुक्त अमरिंद्र कुमार सेंगर ने कोर्ट को बताया कि पीड़ित मोहम्मद शाकिर का मेडिकल कराया गया है और उनका बयान दर्ज कर लिया गया है। वहीं जिला जज ने पुष्टि की कि उन्होंने सीसीटीवी फुटेज देखी है और मारपीट में शामिल कुछ वकीलों की पहचान कर ली गई है।

हाईकोर्ट के निर्देश

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित निर्देश जारी किए:

  1. सुरक्षा व्यवस्था: लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट को निर्देश दिया गया है कि वे दिल्ली के तीनों अधिवक्ताओं—अभिपसा मोहंती, कोमल अग्रवाल और आशुतोष श्रीवास्तव को लखनऊ प्रवास के दौरान तत्काल पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराएं।
  2. पीड़ित की पेशी: पुलिस को आदेश दिया गया कि वे वादी मोहम्मद शाकिर को 22 जुलाई 2026 को सुबह 10:15 बजे हाईकोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश करें।
  3. रिपोर्ट और सीसीटीवी साक्ष्य: जिला जज लखनऊ को निर्देश दिया गया कि वे किसी जिम्मेदार गैर-न्यायिक अधिकारी के माध्यम से पूरी जांच रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज हाईकोर्ट को सौंपें।
  4. पुलिस जांच: पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया गया है कि वे विशेष सेल के माध्यम से अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा, अभय प्रताप वर्मा, हर्षित पांडे और अन्य शामिल व्यक्तियों के आपराधिक इतिहास की जानकारी एकत्र कर रिपोर्ट दाखिल करें।
  5. अधिकारियों की उपस्थिति: संबंधित पुलिस उपायुक्त और वजीरगंज थाने के एस.एच.ओ. को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया गया, जबकि पुलिस आयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े रहेंगे।
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हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह उपयुक्त चरण में इस मुकदमे को लखनऊ जिले से बाहर स्थानांतरित करने के अनुरोध पर विचार करेगा।

मामले का विवरण

मामले का शीर्षक: अनिल कुमार खन्ना बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य
वाद संख्या: आपराधिक विविध याचिका संख्या 8810/2023 (आई.ए. 8/2026)
पीठ: जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मनजीव शुक्ला
निर्णय की तिथि: 21 जुलाई 2026

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