बिजली दर विरोध प्रदर्शन मामला: भगवंत मान को राहत, सुप्रीम कोर्ट 30 जुलाई को करेगा चंडीगढ़ प्रशासन की याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 में बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दर्ज आपराधिक मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (आप) के अन्य नेताओं को मिली राहत के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख तय की है। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की कि इस बात का कोई आरोप नहीं है कि भगवंत मान ने प्रदर्शनकारी भीड़ को उकसाया था।

अदालत की अहम टिप्पणियां

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की तीन जजों की पीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन की अपील पर यह सुनवाई की। सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने सवाल उठाया कि केवल भगवंत मान और अन्य नेताओं की मौजूदगी से आपराधिक साजिश कैसे साबित होती है। पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई आरोप दर्ज नहीं है कि भगवंत मान ने वहां मौजूद भीड़ को भड़काया था।

इसके जवाब में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने तर्क दिया कि नेताओं द्वारा भीड़ को उकसाने के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। हालांकि, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि पीठ अब इस मामले पर 30 जुलाई को सुनवाई करेगी, जब प्रशासन की एक अन्य संबंधित याचिका भी सूचीबद्ध है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि लोकतंत्र में नारेबाजी और प्रदर्शन आम बात हैं। अदालत ने यह उम्मीद भी जताई थी कि भगवंत मान अपने वर्तमान संवैधानिक पद की जिम्मेदारियों को समझते होंगे।

हाईकोर्ट के फैसले को दी गई है चुनौती

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चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसके तहत आप नेताओं के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) और आरोप पत्र को खारिज कर दिया गया था।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत जरूरी कानूनी तत्व मौजूद नहीं हैं। हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 147 (बलवा), 149 (गैरकानूनी सभा), 332 (सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए चोट पहुंचाना) और 353 (सरकारी कर्मचारी पर आपराधिक बल का प्रयोग) के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया था।

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2020 के चंडीगढ़ प्रदर्शन का घटनाक्रम

यह पूरा कानूनी विवाद 2020 में चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी द्वारा बिजली की बढ़ी हुई दरों के विरोध में किए गए प्रदर्शन से जुड़ा है।

पुलिस कांस्टेबल मनप्रीत कौर की शिकायत पर यह एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, भगवंत मान, हरपाल सिंह चीमा, गुरमीत सिंह मीत हेयर, बलजिंदर कौर और अमन अरोड़ा सहित सीनियर आप नेताओं ने लगभग 750 से 800 कार्यकर्ताओं को सेक्टर 2 स्थित तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के आवास की ओर मार्च करने के लिए उकसाया था। पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किए जाने के बाद पथराव किया, जिससे कुछ पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आई थीं।

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