कर्नाटक हाईकोर्ट का निर्देश: लॉ यूनिवर्सिटी में ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों को मिलेगा आरक्षण, पात्रता शर्तों में भी ढील

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कर्नाटक स्टेट लॉ यूनिवर्सिटी (केएसएलयू) को अपने तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए आरक्षण नीति लागू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय अपनी आगामी प्रवेश अधिसूचना में ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों के लिए पात्रता शर्तों में छूट का प्रावधान भी शामिल करे।

जस्टिस अनु शिवरामन और जस्टिस वेंकटेश नाईक टी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2014 के ‘नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (नालसा) बनाम भारत सरकार’ मामले में शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए आरक्षण देने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसी निर्णय के आलोक में केएसएलयू को प्रवेश प्रक्रिया के अगले नोटिफिकेशन में इस आरक्षण को अनिवार्य रूप से जोड़ना होगा।

पात्रता मानदंडों में 2 प्रतिशत की छूट

हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार, केएसएलयू को ट्रांसजेंडर आवेदकों के लिए अर्हता अंकों (एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया) में कम से कम 2 प्रतिशत की कटौती करनी होगी या फिर इसे मौजूदा आरक्षित वर्गों में सबसे निचली सीमा के बराबर तय करना होगा। इन दोनों में से जो भी विकल्प उम्मीदवार के लिए अधिक लाभदायक होगा, उसे लागू किया जाएगा।

एनएलएसआईयू की अपील पर आया फैसला

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यह आदेश नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) की उस अपील पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें उसने सिंगल जज के 16 दिसंबर 2024 के फैसले को चुनौती दी थी। सिंगल जज ने एनएलएसआईयू को ट्रांसजेंडर आरक्षण नीति बनाने, वित्तीय सहायता देने और शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में दाखिले से वंचित रहे एक ट्रांसजेंडर छात्र को 0.5 प्रतिशत अंतरिम आरक्षण के साथ फीस माफी प्रदान करने का निर्देश दिया था।

छात्र के तीन साल खराब होने पर कोर्ट की चिंता

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संबद्ध अभ्यर्थी ने दाखिला न मिलने पर ‘कर्नाटक राज्य ट्रांसजेंडर नीति 2017’ के क्रियान्वयन की मांग को लेकर 2023 में याचिका दायर की थी। पूर्व में अदालत के अंतरिम निर्देश के बावजूद एनएलएसआईयू ने खंडपीठ को सूचित किया कि वह छात्र को नामांकित करने में असमर्थ है।

इस पर जस्टिस शिवरामन ने टिप्पणी की कि अभ्यर्थी अपने तीन शैक्षणिक वर्ष पहले ही गंवा चुका है और अदालत नहीं चाहती कि उसका एक और साल खराब हो। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और यूनिवर्सिटी तंत्र को छात्र के लिए किसी अन्य लॉ कॉलेज में प्रवेश और वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

अन्य कॉलेजों में सीट सुरक्षित

केएसएलयू के कानूनी प्रतिनिधि ने पीठ को सूचित किया कि अदालती निर्देशों के अनुपालन में बीएमएस कॉलेज ऑफ लॉ और शेषाद्रिपुरम लॉ कॉलेज को उस छात्र के लिए सीट आरक्षित करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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राज्य सरकार की नीतिगत तैयारी

राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त एडवोकेट-जनरल रूबेन जैकब ने बताया कि कर्नाटक राज्य महिला विकास निगम ने शिक्षा में ट्रांसजेंडर आरक्षण के संबंध में सर्वेक्षण कर आंकड़े जुटाए हैं। निगम को इस विषय में सरकार के समक्ष औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रोजगार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए लागू 1 प्रतिशत क्षैतिज (हॉरिजॉन्टल) आरक्षण की तर्ज पर राज्य सरकार शिक्षा में भी इस वर्ग को आरक्षण देने पर विचार कर उचित आदेश जारी करेगी।

हाईकोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को करेगा।

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