बामनोली भूमि अधिग्रहण मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘द वायर’ पर आगे रिपोर्टिंग करने से लगी रोक हटाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने डिजिटल न्यूज पोर्टल ‘द वायर’ को पूर्व मुख्य सचिव नरेश कुमार के खिलाफ आगे खबरें प्रकाशित करने से रोकने वाले अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने बामनोली भूमि अधिग्रहण विवाद से जुड़े मामले में कहा कि भविष्य की रिपोर्टिंग पर इस तरह की व्यापक रोक लगाना कानूनी रूप से सही नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने विवादित लेख को फिलहाल हटाने वाले निर्देश को बरकरार रखा है और कहा है कि इस पर अंतिम फैसला मानहानि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद ही होगा।

अदालत का रुख और कानूनी आधार

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अनूप जे भंभानी ने कहा कि 22 नवंबर 2023 के अंतरिम आदेश में भविष्य की सामग्री पर रोक लगाने से जुड़ा निर्देश अत्यधिक व्यापक, अनुमानों पर आधारित और काल्पनिक स्थितियों पर केंद्रित था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस आधार के संभावित प्रकाशनों पर पहले से पाबंदी नहीं लगाई जा सकती। इस टिप्पणी के साथ ही अदालत ने पिछले फैसले के पैरा 30(iii) को हटा दिया, जिसके तहत पोर्टल और उसके पत्रकार पर समान विषय पर आगे कुछ भी लिखने या प्रसारित करने की पाबंदी लगाई गई थी।

पुराने लेख को हटाने का आदेश कायम

भविष्य की कवरेज से पाबंदी हटाते हुए भी हाईकोर्ट ने 9 नवंबर 2023 को प्रकाशित विवादित खबर को हटाने के अंतरिम आदेश में कोई बदलाव करने से इनकार कर दिया। जस्टिस भंभानी ने कहा कि इस खबर को पूरी तरह हटाने या न हटाने का फैसला मुकदमे की सुनवाई (ट्रायल) के पूरा होने के बाद ही संभव है।

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क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला वर्ष 2023 में द्वारका एक्सप्रेसवे के निर्माण से जुड़ा हुआ है। नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने 2018 में बामनोली गांव की 19 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। मई 2023 में इस जमीन का मुआवजा अचानक 41.52 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 353.79 करोड़ रुपये कर दिया गया। मुआवजा राशि में इस बड़े इजाफे के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के जिलाधिकारी हेमंत कुमार को निलंबित कर दिया था।

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इसके बाद 9 नवंबर 2023 को ‘द वायर’ ने एक खबर प्रकाशित की, जिसमें आरोप लगाया गया कि इस मुआवजा बढ़ोतरी के लाभार्थी परिवार के साथ तत्कालीन मुख्य सचिव नरेश कुमार के बेटे के व्यावसायिक संबंध थे।

अदालत में दोनों पक्षों के तर्क

नरेश कुमार ने 13 नवंबर 2023 को कानूनी नोटिस भेजने के बाद अदालत में मानहानि का केस दर्ज कराया था। उनके वकीलों ने दलील दी थी कि यह रिपोर्ट उनके खिलाफ जनभावनाएं भड़काने और कुछ लोगों को खुश करने के लिए सोची-समझी रणनीति के तहत छापी गई थी।

दूसरी ओर, ‘द वायर’ के वकीलों ने मानहानि के आरोपों को खारिज करते हुए अपनी रिपोर्ट का बचाव किया। उन्होंने 14 नवंबर 2023 को दिल्ली की सतर्कता और राजस्व मंत्री आतिशी द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपी गई शुरुआती जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उनकी खबर तथ्यों पर आधारित थी।

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22 नवंबर 2023 का पिछला आदेश

इससे पहले 22 नवंबर 2023 को हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने अंतरिम राहत देते हुए ‘द वायर’ को संबंधित लेख हटाने और नरेश कुमार के खिलाफ आगे ऐसे लेख न छापने का निर्देश दिया था। उस समय पीठ ने टिप्पणी की थी कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन दशकों में कमाई गई प्रतिष्ठा को अप्रमाणित आरोपों की बलि नहीं चढ़ाया जा सकता। पीठ ने यह भी माना था कि रिपोर्ट के प्रकाशन के साथ ही सोशल मीडिया पर राजनीतिक बयानों की बाढ़ आ गई थी, जिससे तत्काल रोक लगाना आवश्यक हो गया था।

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