दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के एक वकील पर हुए हमले के मामले में शीर्ष अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को मामले की जांच तुरंत ट्रांसफर करने को कहा है। सुनवाई के दौरान पीड़ित वकील के सिर पर आई गंभीर चोटों का संज्ञान लेते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि इस मामले में दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) में हत्या के प्रयास (अटेंप्ट टू मर्डर) की धारा जोड़ी जानी चाहिए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 109 और 118 को मामले में शामिल करने का निर्देश दिया। बीएनएसएस की धारा 118 स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाने से जुड़ी है, जबकि धारा 109 अदालत को किसी भी दस्तावेज को जब्त करने का अधिकार देती है। पीठ ने कहा कि शुरुआती जांच को लेकर स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगे हैं, इसलिए निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जांच क्राइम ब्रांच को सौंपना आवश्यक है।
घर में घुसकर जानलेवा हमला और पुलिस की निष्क्रियता के आरोप
यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के सदस्य और एडवोकेट पंकज शर्मा से जुड़ा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर बताया था कि 11 जुलाई 2026 को उनके घर में घुसकर कुछ हमलावरों ने उन पर जानलेवा हमला किया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कोर्ट को बताया कि हमलावरों ने शर्मा को इतनी बेरहमी से पीटा कि उनके सिर पर आठ टांके लगाने पड़े।
याचिका के अनुसार, घटना के बाद शर्मा ने घर में अवैध प्रवेश और मारपीट की धाराओं के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन अगले ही दिन, 12 जुलाई को आरोपी दोबारा उनके घर आ धमके और उन्हें व उनके परिवार को फिर से प्रताड़ित करने और हमला करने की कोशिश की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य आरोपी के एक रसूखदार स्थानीय नेता से करीबी संबंध हैं, जिसके प्रभाव में आकर स्थानीय पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया और न ही पीड़ित परिवार को सुरक्षा दी। वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने देश में कानून-व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि जब देश के सर्वोच्च न्यायालय के एक वकील के साथ घर में घुसकर ऐसा बर्ताव हो सकता है, तो आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेंगे।
कोर्ट की पिछली हिदायत और बार एसोसिएशन का रुख
जांच को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर करने का आदेश देने से पहले, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी। साथ ही प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया था कि एडवोकेट पंकज शर्मा के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को किसी भी तरह का खतरा न हो।
इस पूरे घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने भी कड़ा विरोध जताया था। एसोसिएशन ने मांग की थी कि मामले की जांच के लिए तुरंत एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाए, पूरे मामले को किसी स्वतंत्र एजेंसी को ट्रांसफर किया जाए, शर्मा और उनके परिवार को चौबीसों घंटे सुरक्षा दी जाए और हमले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

