दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को बड़ा झटका देते हुए चेक बाउंस के कई मामलों में उनकी दोषसिद्धि और तीन महीने की जेल की सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राजपाल यादव और अन्य सह-याचिकाकर्ताओं की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी।
यह पूरा मामला ‘नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट’ (परकाम्य लिखत अधिनियम) के तहत दर्ज आपराधिक याचिकाओं से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में बीते 2 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसला सुरक्षित रखने से पहले अदालत ने अभिनेता और शिकायतकर्ता कंपनी के बीच आपसी सहमति से समझौता कराने के कई प्रयास किए थे, लेकिन ये कोशिशें नाकाम रहीं।
मामले की पृष्ठभूमि
इससे पहले, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को दी गई अंतरिम राहत की अवधि बढ़ा दी थी। अदालत ने पाया था कि अभिनेता शिकायतकर्ता कंपनी को करीब 4.25 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुके हैं। इस राशि में 25 लाख रुपये का वह डिमांड ड्राफ्ट भी शामिल था, जिसे सीधे अदालत में जमा कराया गया था। गौरतलब है कि राजपाल यादव को साल 2024 में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत चेक बाउंस के कई मामलों में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई थी।
एक अन्य कर्ज का विवाद
राजपाल यादव एक अलग कर्ज विवाद और उससे जुड़े चेक बाउंस मामले में भी कानूनी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। इस अलग मामले में एक कर्ज न चुका पाने के आरोप के बाद दिल्ली की एक अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस विवाद में बकाया रकम बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपये हो चुकी है। हालांकि, बाद में इस मामले में अभिनेता को अंतरिम जमानत मिल गई थी।

