तेलंगाना हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न और पॉक्सो (POCSO) कानून के तहत आरोपी एक 25 वर्षीय छात्र भागीरथ को सशर्त नियमित जमानत दे दी है। जस्टिस के. सुजाना की एकल पीठ ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने आरोपी को 1 लाख रुपये का निजी मुचलका और दो जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही आरोपी को पुलिस की जांच में पूरा सहयोग करने और गवाहों को प्रभावित न करने की सख्त हिदायत दी गई है।
बचाव पक्ष ने दिया आपसी सहमति और पढ़ाई के नुकसान का तर्क
सुनवाई के दौरान भागीरथ के वरिष्ठ वकील टी. निरंजन रेड्डी ने कोर्ट में दलील दी कि यह पूरा मामला आपसी सहमति के संबंधों से जुड़ा है, इसलिए इस स्थिति में आपराधिक कार्यवाही का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। उन्होंने बताया कि भागीरथ बीबीए (BBA) का छात्र है और पिछले 45 दिनों से अधिक समय से चेरलापल्ली सेंट्रल जेल में बंद है, जिससे उसकी पढ़ाई और निजी जीवन पर बेहद बुरा असर पड़ा है। बचाव पक्ष ने अदालत को आश्वस्त किया कि आरोपी जमानत की सभी शर्तों का पूरी तरह पालन करेगा।
अभियोजन पक्ष द्वारा जमानत का कड़ा विरोध
दूसरी ओर, सरकारी वकील पल्ले नागेश्वर राव ने जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि 8 मई को शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस जांच तेजी से आगे बढ़ी है और अब यह अपने अंतिम चरण में है। जांच टीम ने इस मामले में महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं और कई गवाहों के बयान भी दर्ज किए हैं। उन्होंने कहा कि तय समय सीमा के भीतर कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी जाएगी। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि इस मोड़ पर आरोपी को रिहा करने से वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है, जिससे बची हुई जांच बाधित हो सकती है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस सुजाना ने बीती 6 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी घटनाक्रम
यह मामला तब शुरू हुआ था जब पेट बशीरबाद पुलिस ने 8 मई को एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की की शिकायत पर भागीरथ के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया था। बाद में पीड़ित लड़की का औपचारिक बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराएं जोड़ दी थीं।
हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर अंतरिम राहत न मिलने के बाद 16 मई को भागीरथ को हिरासत में ले लिया गया था। जहां पुलिस का दावा था कि उसे हैदराबाद के बाहरी इलाके से गिरफ्तार किया गया, वहीं आरोपी के वकीलों का कहना था कि उसने जांच में सहयोग करने के लिए खुद स्वैच्छिक आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में चेरलापल्ली सेंट्रल जेल भेज दिया गया था।
इससे पहले, हाईकोर्ट ने 20 जून को भागीरथ को उसकी बीबीए सप्लीमेंट्री परीक्षाओं में शामिल होने के लिए अस्थायी अंतरिम जमानत दी थी। परीक्षाएं खत्म होने के बाद, अदालती आदेश का पालन करते हुए उसने 25 जून को जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था।

