दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट तुरंत बहाल करने का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सक्रिय एक डिजिटल विरोध समूह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आधिकारिक हैंडल को तुरंत अनब्लॉक करने का निर्देश दिया है। केंद्र सरकार ने सुरक्षात्मक प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए इस साल मई में इस अकाउंट पर प्रतिबंध लगा दिया था।

जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जिस चिंता और प्रशासनिक वजहों से इस हैंडल को ब्लॉक किया गया था, अब उसका समय निकल चुका है और वह आधार अप्रासंगिक हो चुका है।

नीट परीक्षा को लेकर केंद्र ने दी थी दलील

केंद्र सरकार ने 21 मई को इस सोशल मीडिया अकाउंट को प्रतिबंधित कर दिया था। सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि 21 जून को होने वाली ‘नीट’ (NEET) की पुनर्परीक्षा से ठीक पहले छात्रों और अभिभावकों के बीच किसी भी तरह के भ्रम या अराजकता की स्थिति को रोकने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।

हालांकि, जस्टिस शर्मा ने स्पष्ट किया कि चूंकि नीट की पुनर्परीक्षा पहले ही शांतिपूर्वक संपन्न हो चुकी है, इसलिए खाते को ब्लॉक रखने की प्राथमिक वजह अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। इसी आधार पर अदालत ने पुराना प्रतिबंध हटाने के निर्देश देते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया।

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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी से उपजा था आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत 15 मई को एक व्यंग्यात्मक डिजिटल मुहिम के रूप में हुई थी। यह पहल सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी से उपजे विवाद के बाद अस्तित्व में आई थी।

शुरुआत के एक हफ्ते के भीतर ही प्रशासनिक आदेश पर इसके मूल एक्स हैंडल को ब्लॉक कर दिया गया था। इसके तुरंत बाद, इस समूह ने ‘कॉकरोच इज बैक’ नाम से एक नया वैकल्पिक हैंडल तैयार किया, जिसके वर्तमान में 2,27,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं। इस आंदोलन से जुड़े लोग ‘कॉकरोच’ की पहचान को डिजिटल सक्रियता और विरोध के एक अनोखे प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा समूह

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यह संगठन खुद को पूरी तरह स्वतंत्र और युवाओं द्वारा संचालित आंदोलन बताता है, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी की चिंताओं को प्रमुखता से उठाना और सरकार की जवाबदेही तय करना है।

वर्तमान में यह समूह शिक्षा क्षेत्र में कथित ढांचागत विफलताओं और नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है और इसके खिलाफ देशव्यापी डिजिटल अभियान चला रहा है।

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