दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह दिल्ली जिमखाना क्लब के खिलाफ चल रही प्रशासनिक बेदखली की कार्यवाही को जुलाई के आखिर तक के लिए टाल दे। इसके साथ ही कोर्ट ने सफदरजंग रोड स्थित इस कीमती परिसर को अपने कब्जे में लेने के सरकारी फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
जस्टिस अवनीश झींगन ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया कि वह एस्टेट ऑफिसर के समक्ष मंगलवार को होने वाली सुनवाई को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई की तारीख, यानी 28 जुलाई के बाद तक के लिए स्थगित कराना सुनिश्चित करें। हाईकोर्ट ने बेदखली की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
क्लब के सदस्यों और स्टाफ ने दी कानूनी चुनौती
यह कानूनी विवाद जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना और ‘दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन’ की ओर से दायर याचिकाओं के बाद सामने आया है। ये याचिकाएं भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) के 22 मई के उस आदेश के खिलाफ चल रहे मुख्य मुकदमे का हिस्सा हैं, जिसके तहत क्लब की परपेटुअल (स्थायी) लीज डीड को रद्द कर दिया गया था।
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन काम करने वाले एलएंडडीओ ने इस औपनिवेशिक काल के क्लब को निर्देश दिया था कि वह 27.3 एकड़ में फैले इस पूरे परिसर को खाली करके 5 जून तक सरकार को सौंप दे। सरकार का कहना है कि इस जमीन की जरूरत राष्ट्रीय रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने के लिए है।
अनाधिकृत कब्जे को लेकर कारण बताओ नोटिस
लीज रद्द करने के आदेश के बाद, एस्टेट ऑफिसर बिपिन कुमार सिंह ने 29 जून को क्लब को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में सरकारी परिसर (अनाधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत क्लब प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा गया था कि उनके खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए।
इस निर्देश के तहत क्लब और परिसर में रहने वाले सभी लोगों को अपना जवाब दाखिल करने और 7 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए पेश होने के लिए कहा गया था।
सुनवाई टालने पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख
सोमवार को कोर्ट की कार्यवाही के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार इन याचिकाओं पर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करेगी। उन्होंने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता खुद मंगलवार को एस्टेट ऑफिसर के सामने पेश होकर सुनवाई स्थगित करने की मांग कर सकते हैं।
हालांकि, जस्टिस झींगन ने सॉलिसिटर जनरल से स्पष्ट कहा कि वे खुद निजी तौर पर यह सुनिश्चित करें कि एस्टेट ऑफिसर के समक्ष होने वाली इस कार्यवाही को हाईकोर्ट की अगली सुनवाई की तारीख यानी 28 जुलाई के बाद तक के लिए टाल दिया जाए।
हाईकोर्ट का यह निर्देश केंद्र सरकार के उस पिछले रुख के बाद आया है, जो उसने 26 मई को कोर्ट के सामने रखा था। तब सरकारी वकील ने अदालत को आश्वस्त किया था कि अधिकारी 5 जून की तय समय सीमा तक क्लब के परिसर पर जबरन कब्जा नहीं करेंगे और इस मामले में कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के तहत ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

