बॉम्बे हाई कोर्ट ने रेप के मामले में महिलाओं के लिए की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को फटकार लगाई

महाराष्ट्र—- बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को सख्त लहजे में फटकार लगाई है। क्योंकि सत्र न्यायाधीश ने रेप पीड़िता का बयान दर्ज करते वक्त और बाद में अपने फैसले में महिलाओं के प्रति अपमानजनक और अश्लील शब्दों का प्रयोग किया था। 

जस्टिस रविंद्र वी घुगे और जस्टिस बी यू देवदवार की खंडपीठ ने कहा कि रेप पीड़िता के गवाही के मराठी संस्करण में उसके द्वारा प्रयोग किए गए कुछ मराठी शब्दों का संकेत दिया गया है। उसके वाबजूद ट्रायल कोर्ट ने उसकी गवाही का अंग्रेजी अनुवाद करते वक्त बार बार आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। 

इस मामले के अभियुक्त को आईपीसी की धारा 376 और 506 के अंतर्गत किए गए अपराध से मुक्त कर दिया गया था। 

पीड़िता ने शिकायत दर्ज की थी कि उसके चचेरे ससुर ने उसके साथ बलात्कार किया है।

हाई कोर्ट ने सत्र न्यायाधीश द्वारा  पीड़िता की गवाही दर्ज करते समय एक विशेष शब्दों का उपयोग करने पर कड़ी आपत्ति जताई है। और बाद में इस शब्द का प्रयोग सेशन कोर्ट के जज द्वारा अपने फैसले में भी किया गया। 

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न्यायालय ने सबूतों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया कि चूड़ियां टूटने की वजह से घायल होने के संबंध में पीड़िता द्वारा दिया गया बयान कोई मेडिकल प्रूफ न होने के मद्देनजर झूठा पाया गया और न ही घटनास्थल पर चूड़ी का कोई टुकड़ा मिला। 

कोर्ट ने कहा कि संदेह कभी सबूत का स्थान नही ले सकता है। और कोर्ट संदेह के आधार पर किसी को सजा नही दे सकती।

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