अंबाजी वन झड़प मामला: गुजरात हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों को जमानत दी, निचली अदालत के क्षेत्राधिकार से बाहर जाने पर जताई कड़ी आपत्ति

गुजरात हाईकोर्ट ने अंबाजी के पास वन विभाग के पौधारोपण अभियान के दौरान हुई हिंसा के मामले में तीन आरोपियों को नियमित जमानत दे दी है। इसके साथ ही अदालत ने बनासकांठा की एक स्थानीय सत्र अदालत द्वारा अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दिए गए पिछले फैसले पर कड़ा रुख अपनाया है।

जस्टिस निखिल करियल की एकल पीठ ने नियमित जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बनासकांठा के प्रभारी सत्र न्यायाधीश के रवैये को बेहद चिंताजनक बताया। हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत का 8 मई का फैसला, जिसमें उसने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483 के तहत उसके अधिकार क्षेत्र के दायरे से बाहर था। यह आदेश खुद हाईकोर्ट द्वारा पहले इसी मामले में दर्ज किए गए निष्कर्षों के भी पूरी तरह विपरीत था।

आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूतों की कमी

तीनों आवेदकों को जमानत देते हुए जस्टिस करियल ने रेखांकित किया कि आरोपियों को इस हिंसा से जोड़ने के लिए कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है। अभियोजन पक्ष का पूरा मामला मुख्य रूप से आरोपियों के खुद को फंसाने वाले बयानों और घटना की एक वीडियो रिकॉर्डिंग पर टिका था। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि यह वीडियो चार्जशीट का हिस्सा ही नहीं था और न ही इससे घटनास्थल पर इन आवेदकों की मौजूदगी स्पष्ट रूप से साबित हो पा रही थी। इसके अलावा, इसी मामले के एक अन्य सह-आरोपी को पहले ही एक सहयोगी पीठ से जमानत मिल चुकी थी।

जमानत की शर्तें और कानूनी दलीलें

READ ALSO  हाई कोर्ट ने ग्वालियर में एबीवीपी के 2 लोगों को जमानत दे दी, जिन पर बीमार वीसी की 'मदद' करने की कोशिश करते हुए डकैती का आरोप था

आरोपियों का पक्ष रखते हुए वकील एजे याज्ञनिक ने तर्क दिया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दायर की जा चुकी है, इसलिए अब आरोपियों को अनिश्चित काल के लिए जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि आरोपी जमानत की सभी शर्तों का पूरी तरह पालन करेंगे। वहीं, राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त लोक अभियोजक हार्दिक सोनी ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि चार्जशीट में आरोपियों पर लगाए गए गंभीर आरोपों और उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें राहत नहीं दी जानी चाहिए।

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने तीनों आरोपियों को 10-10 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही जमानत राशि पर रिहा करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही उन्हें अपने पासपोर्ट सरेंडर करने और जांच में पूरा सहयोग करने को कहा गया है। अभियोजन पक्ष द्वारा मुख्य साजिशकर्ता बताए गए आरोपी पर कोर्ट ने अतिरिक्त प्रतिबंध लगाते हुए छह महीने तक अंबाजी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश करने पर रोक लगा दी है। उसे हर महीने दांता पुलिस स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

READ ALSO  एफसीआरए नवीनीकरण पर केंद्र की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

सत्र न्यायालय द्वारा अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन

हाईकोर्ट का मुख्य ध्यान बनासकांठा सत्र न्यायालय द्वारा 8 मई को जमानत याचिका खारिज किए जाने के तौर-तरीकों पर रहा। जस्टिस करियल ने कहा कि निचली अदालत के जज एक साधारण जमानत सुनवाई की सीमाओं से काफी आगे निकल गए थे और उन्होंने बिना किसी ठोस आधार के इस विवाद को “जमीन कब्जाने” (लैंड ग्रैबिंग) का मामला करार दे दिया था।

इतना ही नहीं, सत्र न्यायाधीश ने अपने इस फैसले की कॉपियां जिला मजिस्ट्रेट, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव, मुख्य सचिव और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया था, ताकि वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा मोब लिंचिंग को लेकर दिए गए दिशानिर्देशों को लागू कर सकें। हाईकोर्ट ने इन सभी निर्देशों को न्यायिक शक्तियों का खुला उल्लंघन माना। इस प्रक्रियागत विसंगति के समाधान के लिए हाईकोर्ट ने अपनी लॉ ऑफिसर्स ब्रांच को आगामी 28 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

अंबाजी झड़प की पृष्ठभूमि

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने बिना सुनवाई के वकील के खिलाफ सख्त टिप्पणी करने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई

यह आपराधिक मामला 13 दिसंबर 2025 को बनासकांठा जिले की दांता तालुका के पडलिया गांव में हुई एक घटना से जुड़ा है। वहां पुलिस सुरक्षा के बीच वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे पौधारोपण अभियान के दौरान लगभग 500 लोगों की उग्र भीड़ ने वन और पुलिस अधिकारियों पर हमला कर दिया था।

एक वन अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई शुरुआती पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, भीड़ ने सड़कों पर पेड़ काटकर और बड़े पत्थर रखकर रास्ता अवरुद्ध कर दिया था। इसके बाद सरकारी कर्मचारियों पर पत्थरों, तीर-धनुषों, तलवारों और कुल्हाड़ियों से हमला किया गया। अंबाजी पुलिस स्टेशन में दर्ज इस प्राथमिकी (FIR) में 500 लोगों की भीड़ में से 26 लोगों को नामजद किया गया था, जिन पर हत्या का प्रयास, डकैती और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles