दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: आरटीआई के दायरे में आएगा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, नागरिकों को देनी होगी जानकारी

दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत एक ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ (पब्लिक अथॉरिटी) है। इस निर्णय के बाद अब आम नागरिकों के लिए आरटीआई कानून के तहत एनएसई से जानकारी हासिल करने का रास्ता साफ हो गया है।

जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस ओ पी शुक्ला की पीठ ने इस मामले में स्टॉक एक्सचेंज की अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने सिंगल जज के उस पुराने फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें एनएसई को आरटीआई कानून की धारा 2(एच) के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित किया गया था।

सरकारी नियंत्रण और सेबी की मंजूरी है अनिवार्य

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि एनएसई की स्थिति किसी ऐसी साधारण निजी कंपनी जैसी नहीं है जिसे बाद में किसी सरकारी कानून के तहत रेगुलेट किया गया हो। कोर्ट ने कहा कि सेबी (SEBI) की मंजूरी के बिना एनएसई एक स्टॉक एक्सचेंज के रूप में काम ही नहीं कर सकता। कोर्ट ने सिंगल जज के इस निष्कर्ष का पूरी तरह समर्थन किया कि एनएसई को सरकार द्वारा जारी एक आदेश के तहत ही स्थापित या गठित माना जाना चाहिए।

आरटीआई अधिनियम की धारा 2(एच) के नियमों का हवाला देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई संस्था सरकार द्वारा नियंत्रित, संचालित या उसके द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर वित्तपोषित होती है, तो उसे ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ की श्रेणी में रखा जाएगा। पीठ ने कहा कि सिंगल जज का यह निष्कर्ष बिल्कुल सही है कि एनएसई पर सरकार का नियंत्रण है और इस फैसले में किसी भी तरह के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

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एक दशक से भी पुराना है यह विवाद

इस कानूनी विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने केंद्रीय सूचना आयुक्त (CIC) के एक आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस चुनौती को खारिज करते हुए 15 अप्रैल 2010 को सिंगल जज ने फैसला सुनाया था कि एनएसई एक सार्वजनिक प्राधिकरण है। इसके बाद स्टॉक एक्सचेंज ने इस फैसले के खिलाफ दो जजों की पीठ (डिवीजन बेंच) के समक्ष अपील दायर की थी। डिवीजन बेंच ने अब इस अपील को बिना किसी अदालती खर्च के खारिज करते हुए विवाद का निपटारा कर दिया है।

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अदालत में स्टॉक एक्सचेंज की दलीलें

सुनवाई के दौरान एनएसई के वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया था कि इस संस्थान का मालिकाना हक, नियंत्रण या वित्तीय ढांचा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सरकार के पास नहीं है। उन्होंने दलील दी कि सेबी का इस पर केवल नियामक (रेगुलेटरी) नियंत्रण है।

स्टॉक एक्सचेंज की ओर से यह आशंका भी जताई गई थी कि यदि केवल रेगुलेटर के नियंत्रण के आधार पर इसे ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ मान लिया गया, तो देश के सभी निजी कमर्शियल बैंक और म्यूचुअल फंड जैसी संस्थाएं भी आरटीआई के दायरे में आ जाएंगी। एक्सचेंज का कहना था कि इससे आरटीआई कानून का मूल दायरा और उद्देश्य ही प्रभावित होगा। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए सिंगल जज के फैसले को सही ठहराया।

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