जयपुर पोलो ग्राउंड विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने टर्फ को नुकसान न पहुंचाने के सरकारी आश्वासन के बाद सुनवाई 9 जुलाई तक टाली

दिल्ली हाईकोर्ट ने जयपुर पोलो ग्राउंड से बेदखली के खिलाफ इंडियन पोलो एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई 9 जुलाई तक के लिए टाल दी है। केंद्र सरकार की ओर से अदालत को भरोसा दिलाया गया है कि तब तक खेल के मुख्य मैदान (टर्फ) के साथ कोई छेड़छाड़ या खुदाई नहीं की जाएगी।

बुधवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर ने मामले को आगे बढ़ाने का फैसला किया क्योंकि संबंधित पक्षों के पास फिलहाल निचली अदालत के आदेश की भौतिक प्रति उपलब्ध नहीं थी। पोलो एसोसिएशन ने सेशंस कोर्ट के 18 जून के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उसकी बेदखली पर अंतरिम रोक लगाने की मांग खारिज कर दी गई थी।

टर्फ को सुरक्षित रखने का सरकारी भरोसा

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील आशीष दीक्षित ने अदालत को आश्वस्त किया कि अधिकारी केवल बाड़ लगाने के लिए सीमांकन कर रहे हैं और खेल के मुख्य मैदान को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। दीक्षित ने अदालत को बताया कि ऐसा ही आश्वासन उन्होंने 29 जून को वैकेशन बेंच के समक्ष भी दिया था।

इस पर जस्टिस शंकर ने मौखिक टिप्पणी की कि चूंकि जमीन पर पहले से ही सरकार का भौतिक कब्जा है, इसलिए मैदान को तुरंत उजाड़ने या खोदने की कोई जल्दी नहीं होनी चाहिए।

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23 जुलाई को सेशंस कोर्ट में होनी है मुख्य सुनवाई

एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कीर्तिमान सिंह ने दलील दी कि बेदखली के मूल आदेश के खिलाफ उनकी मुख्य अपील पर 23 जुलाई को सेशंस कोर्ट में सुनवाई होनी है। उन्होंने मांग की कि तब तक अधिकारियों को मैदान को नुकसान न पहुंचाने का निर्देश दिया जाए, क्योंकि खेल के लिए तैयार विशेष टर्फ को नुकसान पहुंचने से अपूरणीय क्षति होगी।

इसके साथ ही सिंह ने पोलो एसोसिएशन को मैदान का निरीक्षण करने की अनुमति देने का भी अनुरोध किया। हालांकि, जस्टिस शंकर ने इस पर कोई औपचारिक निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया और दोनों पक्षों को आपस में इस पर बात करने की सलाह दी।

ऐतिहासिक खेल मैदान को लेकर कानूनी विवाद

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यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्र सरकार ने बीते 20 मई को एक बेदखली आदेश जारी कर 15.20 एकड़ में फैले ऐतिहासिक जयपुर पोलो ग्राउंड को अपने कब्जे में ले लिया था। इसके खिलाफ एसोसिएशन ने ‘सरकारी परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम’ के तहत सेशंस कोर्ट में अपील दायर की थी।

सेशंस कोर्ट द्वारा 18 जून को इस बेदखली पर रोक लगाने की अंतरिम याचिका खारिज किए जाने के बाद एसोसिएशन ने हाईकोर्ट का रुख किया। एसोसिएशन का तर्क है कि जयपुर पोलो ग्राउंड कोई सामान्य खाली जमीन नहीं है, बल्कि एक विशिष्ट खेल सुविधा है। इसके रख-रखाव के लिए कुशल कर्मियों द्वारा नियमित सिंचाई, घास की कटाई, समतलीकरण और खरपतवार नियंत्रण की आवश्यकता होती है। याचिका में कहा गया है कि बिना विशेषज्ञ की देखरेख के भारी मशीनों के इस्तेमाल या किसी भी तरह के निर्माण कार्य से यह टर्फ हमेशा के लिए नष्ट हो जाएगा।

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