बेंगलुरु एसिड अटैक मामला: राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने पीड़ित का मुआवजा बढ़ाकर 17.21 लाख रुपये किया

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने वर्ष 2007 के बेंगलुरु तेजाब हमले के एक मामले में पीड़ित को मिलने वाली मुआवजा राशि बढ़ाकर 17,21,865 रुपये कर दी है। आयोग ने पाया कि राज्य उपभोक्ता आयोग ने पीड़ित की शारीरिक विकलांगता का आकलन 75 प्रतिशत के बजाय गलती से 50 प्रतिशत किया था। इस त्रुटि में सुधार करते हुए राष्ट्रीय आयोग ने मुआवजे में लगभग चार लाख रुपये की बढ़ोतरी की है।

विकलांगता प्रमाण पत्र के आधार पर बढ़ा मुआवजा

जस्टिस सुदीप अहलुवालिया और डॉ. साधना शंकर की पीठ ने पीड़ित रामनाथन एम. की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल द्वारा 25 सितंबर 2009 को जारी विकलांगता प्रमाण पत्र में चेहरे की गंभीर विकृति के कारण रामनाथन की स्थायी विकलांगता 75 प्रतिशत दर्ज थी। इसके बावजूद, कर्नाटक राज्य उपभोक्ता आयोग ने जून 2017 के अपने आदेश में विकलांगता को 50 प्रतिशत मानकर 13,19,577 रुपये का मुआवजा तय किया था।

राष्ट्रीय आयोग ने इस गड़बड़ी को सुधारते हुए चेहरे की विकृति और स्थायी विकलांगता मद में राशि को 8,04,576 रुपये से बढ़ाकर 12,06,864 रुपये कर दिया। इसके साथ स्वीकृत चिकित्सा व अन्य खर्चों को जोड़कर कुल मुआवजा 17,21,865 रुपये निर्धारित किया गया। आयोग ने मुआवजे की अन्य मदों में बदलाव करने से इनकार कर दिया, क्योंकि विकलांगता प्रमाण पत्र उनकी 2010 की मूल शिकायत से पहले की तारीख का था।

अस्पताल परिसर में हुई थी घटना

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यह पूरा विवाद 4 मई 2007 की एक घटना से जुड़ा है। रामनाथन बेंगलुरु स्थित मणिपाल अस्पताल में अक्टूबर 2004 से फार्मासिस्ट के पद पर कार्यरत थे। घटना के दिन वे अस्पताल की तीसरी मंजिल के प्रतीक्षा क्षेत्र में अपने भाई से मिलने पहुंचे थे, जो सड़क दुर्घटना के बाद वहां भर्ती थे। इसी दौरान अस्पताल की एक नर्स ने कथित तौर पर उन पर तेजाब फेंक दिया, जिससे वे गंभीर रूप से झुलस गए थे।

घटना के तुरंत बाद रामनाथन को मणिपाल अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर विशेषज्ञ इलाज के लिए सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल स्थानांतरित किया गया। लंबे उपचार के दौरान उनके स्वास्थ्य सुधार के लिए लगभग 12 सर्जरी की गईं।

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कानूनी लड़ाई और पिछले फैसले

रामनाथन ने शुरुआत में इलाज के खर्च, विकलांगता, आय क्षमता के नुकसान और शारीरिक पीड़ा के एवज में लगभग 64 लाख रुपये के मुआवजे का दावा ठोका था। 7 अगस्त 2012 को जिला उपभोक्ता फोरम ने उन्हें 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 1.5 लाख रुपये देने का निर्देश दिया।

इसके बाद कर्नाटक राज्य आयोग ने 23 जून 2017 को मुआवजा बढ़ाकर 13,19,577 रुपये कर दिया, जिस पर 8 प्रतिशत ब्याज और 10,000 रुपये कानूनी खर्च शामिल था। राज्य आयोग ने मणिपाल अस्पताल और पीएनबी मेटलाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को संयुक्त रूप से उत्तरदायी ठहराया था। इस फैसले में विकलांगता 50 प्रतिशत आंके जाने से असंतुष्ट होकर रामनाथन ने राष्ट्रीय आयोग का रुख किया था।

बीमा कंपनी की याचिका और अस्पताल की भूमिका

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सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय आयोग ने स्पष्ट किया कि पीएनबी मेटलाइफ द्वारा 2018 में दायर एक अलग याचिका फिलहाल लंबित है और 24 जून 2026 की सुनवाई में बीमाकर्ता की ओर से कोई उपस्थित नहीं था। आयोग ने कहा कि इस नए आदेश से बीमा कंपनी के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और उसकी वित्तीय देनदारी उसकी लंबित याचिका व पॉलिसी शर्तों के अधीन रहेगी।

आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि मणिपाल अस्पताल ने मानवीय आधार पर रामनाथन के शुरुआती इलाज के लिए लगभग 1.5 लाख रुपये का खर्च वहन किया था, जबकि अन्य देनदारियां नियोक्ता की ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसियों के तहत आती हैं।

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