कलकत्ता हाईकोर्ट तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर आगामी 10 जून को सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने राज्य पुलिस के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है। यह पूरा मामला टीएमसी के बागी विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर से जुड़ा हुआ है।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति चैतल चटर्जी (दास) की अवकाश पीठ ने निर्देश दिया कि इस मामले को अदालत की गर्मियों की छुट्टियों के बाद नियमित पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। बनर्जी के वकीलों द्वारा शुक्रवार सुबह की गई त्वरित सुनवाई की अपील के बाद अदालत ने यह तारीख तय की।
हस्ताक्षर जालसाजी और सीआईडी जांच की शुरुआत
यह पूरा विवाद टीएमसी के दो बागी विधायकों के हस्ताक्षरों में हुई कथित जालसाजी से जुड़ा है, जिसकी जांच राज्य की सीआईडी कर रही है। विधायकों का आरोप है कि पार्टी के एक प्रस्ताव पत्र पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके जरिए बालीगंज के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया था।
इस मामले में बागी विधायक रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा सचिवालय में शिकायत दर्ज कराई थी। सचिवालय की शिकायत पर कोलकाता पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, जिसे बाद में राज्य के गृह सचिव के निर्देश पर आगे की जांच के लिए सीआईडी को सौंप दिया गया।
पूछताछ के लिए सीआईडी का नया नोटिस
सीआईडी ने इस मामले में अभिषेक बनर्जी को एक नया नोटिस जारी कर 8 जून को जांच अधिकारी के सामने पेश होने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले उन्हें सोमवार को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन बनर्जी ने अपनी खराब सेहत का हवाला देते हुए पेश होने के लिए और समय मांगा था।
सोनारपुर में हमला और इलाज
टीएमसी संगठन में दूसरे सबसे बड़े नेता माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी पर बीते 30 जून को दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में एक भीड़ ने हमला कर दिया था। वह वहां चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा के एक पीड़ित से मिलने उसके घर गए थे। इस घटना के बाद उसी शाम बनर्जी का दो निजी अस्पतालों में इलाज कराया गया था, हालांकि उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की नौबत नहीं आई थी।

