गैंगस्टर एक्ट मामला: पूर्व सपा सांसद रिजवान जहीर को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द की पूरी कार्रवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद रिजवान जहीर और उनके दामाद रमीज नेमत को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत चल रही सभी कार्यवाहियों को खारिज कर दिया है। अदालत ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में बिना सोचे-समझे यांत्रिक रूप से काम किया गया और कानून के कड़े प्रावधानों की अनदेखी की गई।

जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने इस मामले में गत 26 मई को सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे 29 मई को सुनाया गया। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत द्वारा आरोपियों के खिलाफ जारी की गई चार्जशीट, संज्ञान (कॉग्निजेंट) आदेश और समन आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि आरोपियों की गतिविधियों से समाज की शांति भंग हुई थी या उन्होंने अवैध आर्थिक लाभ कमाने के इरादे से काम किया था।

तारीखों का बड़ा विरोधाभास

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता बी ए खान ने पुलिस की कहानी पर सवाल उठाते हुए तारीखों की एक बड़ी गड़बड़ी को अदालत के सामने रखा। उन्होंने बताया कि स्थानीय थाना प्रभारी (एसएचओ) ने कथित गैंग का चार्ट 7 जुलाई 2024 को ही तैयार कर लिया था। दूसरी तरफ, पुलिस की प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में यह दावा किया गया कि गश्त कर रही पुलिस टीम को इस कथित गैंग के सक्रिय होने की जानकारी पहली बार 20 जुलाई 2024 को मिली।

जस्टिस विद्यार्थी ने इस विरोधाभास को बेहद गंभीर और अस्वाभाविक माना। अदालत ने कहा कि एफआईआर में लिखी गई यह कहानी पूरी तरह से अविश्वसनीय लगती है और इससे साफ तौर पर पुलिस की दुर्भावनापूर्ण मंशा उजागर होती है।

READ ALSO  पीएमएलए पुनर्विचार याचिकाएं: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और याचिकाकर्ताओं से तय मुद्दे तैयार करने को कहा

ठोस सबूतों का अभाव

यह पूरा मामला बलरामपुर जिले के तुलसीपुर थाने में दर्ज एक एफआईआर से शुरू हुआ था। पुलिस द्वारा तैयार और अनुमोदित गैंग चार्ट में रमीज नेमत को गैंग लीडर और पूर्व सांसद रिजवान जहीर को गैंग का सदस्य बताया गया था। इसके लिए उनके खिलाफ दर्ज दो पुराने मामलों को आधार बनाया गया था, जिसमें पहला साल 2022 का हत्या के प्रयास का मामला था और दूसरा साल 2023 का हत्या का मामला था।

READ ALSO  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को संबोधित करने में गलत प्रोटोकॉल पर लगाई फटकार, न्यायिक गरिमा के प्रति सम्मान पर दिया जोर

राज्य सरकार की ओर से पेश अपर शासकीय अधिवक्ता जी डी भट्ट ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि क्षेत्र में आरोपियों का काफी रसूख और खौफ है, जिसके चलते आम लोग उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। उन्होंने दावा किया कि गैंगस्टर एक्ट को लागू करने में सभी कानूनी और प्रक्रियात्मक नियमों का पूरी तरह पालन किया गया है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने सरकार की इन दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई भी सबूत नहीं रखा गया जिससे यह साबित हो सके कि गैंगस्टर चार्ट में शामिल हत्या का मामला किसी भी तरह के आर्थिक लाभ के लिए किया गया था या इससे सार्वजनिक जीवन अस्त-व्यस्त हुआ था।

READ ALSO  अस्थायी अतिथि व्याख्याताओं की जगह अधिक योग्य उम्मीदवार आ सकते हैं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तदर्थ नियुक्तियों पर अपील खारिज की

अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि मामले के जांच अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिला मजिस्ट्रेट और ट्रायल कोर्ट ने कानून और उसके साल 2021 के नियमों के तहत जरूरी स्वतंत्र जांच किए बिना ही बेहद सामान्य और सतही तरीके से काम किया। नियमों का पालन न होने के कारण हाईकोर्ट ने इस पूरी कानूनी कार्रवाई को खारिज कर दिया।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles