एक अप्रत्याशित प्रशासनिक घटनाक्रम में, जस्टिस आलोक कुमार वर्मा ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के जज के पद से अपना इस्तीफा दे दिया है। केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा बुधवार, 27 मई 2026 को जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से इस निर्णय की घोषणा की गई।
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, जस्टिस वर्मा का यह इस्तीफा 30 अप्रैल, 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव (retrospective effect) के साथ स्वीकार कर लिया गया है।
मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि जस्टिस वर्मा का इस्तीफा भारतीय संविधान के प्रावधानों के अनुरूप दिया गया है:
“27.05.2026 दिनांकित समसंख्यक अधिसूचना के माध्यम से, श्री न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा ने संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) के परंतुक (क) के अनुसरण में, 30.04.2026 से उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद से अपना इस्तीफा दे दिया है।”
भारत के संविधान के अनुच्छेद 217(1)(क) के तहत, हाई कोर्ट का कोई भी आसीन जज राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लिखित त्यागपत्र द्वारा किसी भी समय अपने पद से इस्तीफा दे सकता है।
एक प्रतिष्ठित न्यायिक करियर
16 अगस्त, 1964 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में जन्मे जस्टिस आलोक कुमार वर्मा का भारतीय न्यायिक प्रणाली में लगभग चार दशकों का एक लंबा और अत्यंत सम्मानित करियर रहा है।
- प्रारंभिक शिक्षा: उन्होंने वाराणसी के डी.ए.वी. (पी.जी.) कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और इसके बाद 1985 में हरीश चंद्र स्नातकोत्तर कॉलेज से एलएल.बी. (LL.B.) की डिग्री हासिल की।
- न्यायिक सेवा में प्रवेश: वर्ष 1987 में, वह उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा (1982 बैच) में शामिल हुए। उनकी पहली नियुक्ति झांसी में मुंसिफ (सिविल जज, जूनियर डिवीजन) के रूप में हुई थी।
- उत्तराखंड न्यायिक सेवा का विकल्प: 9 नवंबर, 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर नए उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) राज्य के गठन के बाद, उन्होंने उत्तराखंड न्यायिक सेवा में जाने का विकल्प चुना।
- जिला न्यायपालिका और प्रशासनिक भूमिकाएं: उन्होंने टिहरी गढ़वाल, चमोली, उधम सिंह नगर और देहरादून सहित राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों में जिला जज के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उत्तराखंड सरकार के प्रमुख सचिव (संसदीय कार्य एवं विधि) के रूप में भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाली।
- हाई कोर्ट में पदोन्नति: अपने इस्तीफे की आधिकारिक अधिसूचना से ठीक सात साल पहले, यानी 27 मई, 2019 को उन्होंने उत्तराखंड हाई कोर्ट के अतिरिक्त जज (Additional Judge) के रूप में शपथ ली थी। बाद में, मई 2021 में उन्हें कोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया था।
जस्टिस वर्मा द्वारा कार्यकाल पूरा होने से पहले अचानक दिए गए इस इस्तीफे का कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद अब हाई कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा मुकदमों की सुनवाई के लिए नए सिरे से रोस्टर और मामलों का आवंटन तय किए जाने की उम्मीद है।

