ITAT में खाली पदों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र को नोटिस, हाई कोर्ट से डेपुटेशन पर न्यायिक अधिकारी भेजने का सुझाव

आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) में लंबे समय से खाली पड़े पदों और प्रशासनिक सुस्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। साथ ही, न्यायाधिकरण के काम को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए एक बड़ा सुझाव देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर राज्य के हाई कोर्ट्स से न्यायिक अधिकारियों को डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर बुलाया जा सकता है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस गंभीर संकट के समाधान के लिए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से भी तुरंत सहयोग मांगा है।

संकट टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट का ‘अंतरिम फॉर्मूला’

प्रशासनिक रिक्तियों के कारण टैक्स विवादों के निपटारे में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक वैकल्पिक और अस्थाई समाधान पेश किया।

पीठ ने निर्देश देते हुए कहा, “याचिका की एक प्रति अटॉर्नी जनरल के कार्यालय को सौंपी जाए ताकि आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण में खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरा जा सके। एक अंतरिम व्यवस्था के तौर पर, ट्रिब्यूनल सीधे हाई कोर्ट्स से न्यायिक अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजने का अनुरोध कर सकते हैं, बशर्ते उन अधिकारियों को वहां से कार्यमुक्त करना संभव हो।”

इस अस्थाई कदम का उद्देश्य सरकार द्वारा स्थाई नियुक्तियां किए जाने तक न्यायाधिकरण के दैनिक कार्यों को बिना किसी बाधा के जारी रखना है।

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वर्षों से खाली पड़े हैं रजिस्ट्रार जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद

यह पूरा मामला ITAT के पूर्व उपाध्यक्ष प्रवीण कुमार बंसल द्वारा दायर की गई एक जनहित याचिका (PIL) के बाद सामने आया। बंसल ने न्यायाधिकरण में कर्मचारियों और सदस्यों की भारी कमी को लेकर चिंता जाहिर की थी।

याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए देश के जाने-माने वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि स्थिति काफी चिंताजनक है। रोहतगी ने कोर्ट के सामने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रार समेत सभी अधिकारी स्तर के मुख्य पद पिछले कई वर्षों से पूरी तरह खाली पड़े हैं, जिससे न्यायाधिकरण पंगु जैसी स्थिति में पहुंच गया है।

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सालों की देरी पर सर्वोच्च अदालत ने जताई हैरानी

इतने महत्वपूर्ण न्यायाधिकरण के शीर्ष प्रशासनिक पदों का वर्षों तक खाली रहना सुप्रीम कोर्ट के लिए भी हैरान करने वाला था। पीठ ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण पद इतने लंबे समय तक कैसे बिना भरे रह सकते हैं।

केंद्र सरकार से जवाब और कार्ययोजना (action plan) मांगने के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी को आश्वस्त किया कि अदालत इस संकट का जल्द समाधान निकालने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी व्यक्तिगत रूप से इस मामले की समीक्षा करेगी।

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