इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ‘ई-बुकलेट प्रारूप में ऐतिहासिक निर्णय’ का चौथा और पांचवां संस्करण जारी किया; राज नारायण मामला और कानपुर बम ब्लास्ट निर्णय शामिल

आम जनता के लिए न्यायिक इतिहास को सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी प्रमुख डिजिटल श्रृंखला ‘ई-बुकलेट प्रारूप में ऐतिहासिक निर्णय’ (Historical Judgments in e-Booklet Form) के चौथे और पांचवें संस्करण को जारी करने की घोषणा की है। 20 मई 2026 को एआई असिस्टेड लीगल ट्रांसलेशन एडवाइजरी, ई-एएचसीआर (e-AHCR) और आईएलआर (ILR) समिति द्वारा जारी इन नए संस्करणों में दो ऐतिहासिक निर्णयों—स्वतंत्रता-पूर्व के ‘कानपुर बम ब्लास्ट मामले’ और ऐतिहासिक चुनाव विवाद ‘राज नारायण बनाम इंदिरा नेहरू गांधी’—के आधिकारिक हिंदी अनुवाद को पहली बार इस प्रारूप में सार्वजनिक रूप से सुलभ कराया गया है।

इस पहल का उद्देश्य भारत की न्यायिक विरासत को संरक्षित करना और उसका प्रसार करना है, जो ऐतिहासिक निर्णयों का हिंदी में अनुवाद करने की हाईकोर्ट की एक व्यापक और सतत परियोजना का हिस्सा है। इसी श्रृंखला के तहत, पहले, दूसरे और तीसरे संस्करणों में पूर्व में अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मुकदमों, जैसे कि ‘चौरी-चौरा मामला’, ‘केशव सिंह मामला’ और ‘आगरा षड्यंत्र मामला’ के अनुवाद प्रकाशित किए जा चुके हैं। हाईकोर्ट ने पुष्टि की है कि अन्य ऐतिहासिक मामलों के निर्णयों का हिंदी अनुवाद ई-पुस्तिका श्रृंखला के आगामी संस्करणों में प्रकाशित किया जाएगा।

जारी किए गए ऐतिहासिक निर्णयों का महत्व

नए अनुवादित दो निर्णय औपनिवेशिक और स्वतंत्रता-ओत्तर दोनों भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण मोड़ों को दर्शाते हैं:

  1. कानपुर बम ब्लास्ट मामला (चौथा संस्करण): इस ई-पुस्तिका में वर्ष 1944 की क्रिमिनल अपील संख्या 1028 में 15 मार्च 1946 को सुनाए गए निर्णय का हिंदी अनुवाद शामिल है। हाईकोर्ट के आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, यह मामला “भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक मील का पत्थर है, जिसमें औपनिवेशिक भारतीय कानून के तहत षड्यंत्र और बम विस्फोट के आरोप शामिल हैं।” यह मुकदमा “ब्रिटिश कानून के खिलाफ विद्रोहात्मक गतिविधियों की साजिश रचने के लिए व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों से उत्पन्न हुआ था, जो आमतौर पर राष्ट्रवादियों को निशाना बनाने वाले स्वतंत्रता-पूर्व के मामलों की विशेषता थी।”
  2. राज नारायण बनाम इंदिरा नेहरू गांधी (पांचवां संस्करण): यह संस्करण वर्ष 1971 की चुनाव याचिका संख्या 05 में 12 जून 1975 को पारित ऐतिहासिक निर्णय का हिंदी अनुवाद प्रदान करता है। इस ऐतिहासिक मामले में “तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की रायबरेली लोकसभा चुनाव में जीत को चुनौती दी गई थी।” इसके संवैधानिक महत्व को रेखांकित करते हुए, हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि इस निर्णय ने यह “स्थापित किया कि लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और कानून के शासन से ऊपर कोई नहीं है।”
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परियोजना के उद्देश्य और डिजिटल सुलभता

इस अनुवाद परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य “ज्ञान का लोकतंत्रीकरण करना और पाठकों के लिए अपनी समृद्ध न्यायिक विरासत को आसानी से सुलभ बनाना” है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह श्रृंखला “विधि शोधकर्ताओं, अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और कानून के छात्रों सहित सभी हितधारकों के लिए अमूल्य सामग्री साबित होगी,” जबकि आम लोगों के लिए भी “ज्ञान प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण साधन” बनेगी।

अधिकतम लोगों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, इन अनुवादित ई-पुस्तिकाओं को जनता के लिए मुफ्त उपलब्ध कराया गया है। इन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर ‘ई इलाहाबाद उच्च न्यायालय निर्णय पत्रिका (e-AHCR)’ टैब के अंतर्गत सीधे प्राप्त किया जा सकता है।

सुवास (SUVAS) सेल का क्रियान्वयन और उपलब्धियां

अनुवाद प्रक्रिया को इलाहाबाद और लखनऊ बेंचों में कार्यरत सुवास (SUVAS) सेल द्वारा उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रणालियों का उपयोग करके निष्पादित किया जा रहा है। यह परियोजना इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति श्री अरुण भंसाली के संरक्षण में और ‘एआई असिस्टेड लीगल ट्रांसलेशन एडवाइजरी, ई-एएचसीआर और आईएलआर समिति’ के कुशल मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है।

इस समिति का नेतृत्व इसके अध्यक्ष, माननीय न्यायमूर्ति श्री अजीत कुमार कर रहे हैं, जिनके साथ अन्य माननीय सदस्य न्यायाधीश शामिल हैं:

  • माननीय न्यायमूर्ति श्री समीर जैन
  • माननीय न्यायमूर्ति श्री विक्रम डी. चौहान
  • माननीय न्यायमूर्ति श्री विवेक कुमार सिंह
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न्यायिक प्रणाली में भाषाई बाधाओं को दूर करने के अपने व्यापक मिशन में सुवास सेल ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। अब तक, इस सेल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के “82,000 से अधिक निर्णयों” का हिंदी में अनुवाद किया है। इसके अतिरिक्त, इसने “उत्तर प्रदेश राज्य से जुड़े माननीय सर्वोच्च न्यायालय के तीन सौ से अधिक निर्णयों” का अनुवाद कर उन्हें हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह परियोजना “हितधारकों और आम लोगों को हिंदी में निर्णयों को समझने के लिए सशक्त बना रही है ताकि इसके अंतिम लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।”

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