न्यायपालिका को बदनाम करने का आरोप: अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत ‘आप’ नेताओं को दिल्ली हाईकोर्ट का अवमानना नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को एक आपराधिक अवमानना मामले में औपचारिक नोटिस जारी किया है। अदालत ने यह कड़ा कदम दिल्ली आबकारी नीति मामले की सुनवाई के दौरान न्यायपालिका के खिलाफ सोशल मीडिया पर चलाए गए कथित सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान (vilification campaign) पर स्वत: संज्ञान लेते हुए उठाया है।

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इन नेताओं को नोटिस जारी किए। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के साथ-साथ कोर्ट ने ‘आप’ के अन्य प्रमुख नेताओं—संजय सिंह, विनय मिश्रा, सौरभ भारद्वाज और दुर्गेश पाठक को भी इस मामले में पक्षकार बनाते हुए नोटिस भेजा है।

क्या है पूरा मामला?

इस स्वत: संज्ञान (suo motu) आपराधिक अवमानना मामले की शुरुआत पिछले सप्ताह दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने की थी। दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अदालत के खिलाफ बेहद तीखी और आक्रामक टिप्पणियां की गई थीं, जिसे कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया।

जस्टिस शर्मा के अनुसार, सोशल मीडिया पर की गई यह बयानबाजी सामान्य जन-प्रतिक्रिया की सीमा को पार कर गई थी। उन्होंने टिप्पणी की कि ‘आप’ नेताओं द्वारा डिजिटल स्पेस में चलाया गया यह अभियान एक “सोचा-समझा दुष्प्रचार” था, जिसका उद्देश्य कानूनी प्रक्रिया और अदालत के अधिकार क्षेत्र को कमजोर करना था।

संस्थागत साख पर चोट का आरोप

अपनी टिप्पणियों में जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह डिजिटल हमला केवल किसी एक सिटिंग जज (व्यक्तिगत रूप से उन पर) के खिलाफ नहीं था। बल्कि, उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के संगठित अभियान पूरी न्यायपालिका की गरिमा, निष्पक्षता और न्याय वितरण प्रणाली की साख पर सीधा प्रहार करते हैं।

READ ALSO  नित्यानंद पर अपनी बेटियों को अवैध रूप से बंधक बनाने का आरोप लगाने वाले पिता की याचिका पर गुजरात हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय से जवाब मांगा

अब जबकि मामला जस्टिस चावला और जस्टिस डुडेजा की खंडपीठ के पास पहुंच चुका है, आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। आबकारी नीति के मुख्य मामले के साथ-साथ अब पार्टी को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी आक्रामक बयानबाजी और संचार रणनीति को लेकर भी कोर्ट में जवाब देना होगा।

Ad 20- WhatsApp Banner
READ ALSO  न्यायालय, न्यायाधिकरण या प्राधिकरण के साथ धोखाधड़ी करके प्राप्त निर्णय, डिक्री या आदेश कानून की नजर में अमान्य और गैर-मान्य है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles