“शूट एंड स्कूट” कोई प्रदर्शन नहीं: जेपी नड्डा के घर पर जलता पुतला फेंकने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, हत्या के प्रयास के आरोप रहेंगे बरकरार

विरोध प्रदर्शन की आड़ में होने वाली अराजकता और हिंसा पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने साल 2022 में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष (वर्तमान में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री) जेपी नड्डा के सरकारी आवास पर जलता हुआ पुतला फेंकने के आरोपी नौ प्रदर्शनकारियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।

अदालत ने इन आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास (IPC धारा 307) और आगजनी (IPC धारा 436) जैसी गंभीर धाराओं को हटाने से मना करते हुए याचिका खारिज कर दी। जस्टिस मनोज जैन ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि “सिर्फ इसलिए कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ,” आरोपियों के अपराध की गंभीरता कम नहीं हो जाती। अदालत ने इस कृत्य को लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि “शूट एंड स्कूट” (वार करो और भाग जाओ) की कायरतापूर्ण रणनीति करार दिया।

क्या है जून 2022 का यह मामला?

यह पूरा मामला जून 2022 का है। उस समय केंद्र सरकार की ‘अग्निवीर’ सैन्य भर्ती योजना के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। इसी दौरान, पेशेवर डिग्रियों की पढ़ाई कर रहे नौ छात्रों ने मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित जेपी नड्डा के आधिकारिक आवास के बाहर प्रदर्शन किया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने गार्ड रूम की छत पर जलता हुआ पुतला फेंक दिया। इस मामले में तुगलक रोड थाने में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई, जिसमें आरोपियों पर निम्न धाराएं लगाई गईं:

  • IPC धारा 307: हत्या का प्रयास
  • IPC धारा 436: आग या विस्फोटक पदार्थ से तबाही मचाना
  • इसके अलावा दंगा करने, गैर-कानूनी रूप से इकट्ठा होने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप भी शामिल थे।
READ ALSO  फर्जी दस्तावेज मामले में 'गॉडमैन' आसाराम को मिली जमानत, नाबालिग के यौन शोषण के आरोप में जेल में रहना होगा

नवंबर 2025 में एक निचली अदालत ने आरोपियों की इन धाराओं को हटाने (डिस्चार्ज) की अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

‘कायरों की तरह भाग जाना प्रदर्शन नहीं’: हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

बचाव पक्ष के वकील विमल त्यागी ने अदालत में दलील दी कि छात्र शांतपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे और उनके पास कोई घातक हथियार नहीं था। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि कोई घायल नहीं हुआ, इसलिए उन पर हत्या के प्रयास का मामला नहीं बनता। बचाव पक्ष ने कोर्ट से धारा 307 की जगह हल्की धारा 285 (आग से लापरवाही का कृत्य) लगाने की मांग की।

जस्टिस मनोज जैन ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। सीसीटीवी (CCTV) फुटेज का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह सबूत शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दावे की पूरी तरह पोल खोलता है।

न्यायाधीश ने अपने 16 मई के आदेश में सवाल उठाया: “क्या इसे वैध रूप से ‘प्रदर्शन’ कहा जा सकता है जहां कथित प्रदर्शनकारी किसी व्यक्ति का पुतला फूंकने के बाद सड़क, फुटपाथ और सर्विस लेन पार करके सरकारी बंगले के गार्ड रूम की छत पर उसका जलता हुआ हिस्सा फेंक देते हैं? वो भी तब, जब अंदर मौजूद सुरक्षाकर्मी उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे हों… और इसके बाद वे कथित प्रदर्शनकारी कानून का सामना करने के बजाय कायरों की तरह तुरंत भाग खड़े होते हैं? इसका जवाब है- बिल्कुल नहीं। यह और कुछ नहीं बल्कि एक उद्दंड और विघटनकारी कृत्य है।”

लापरवाही नहीं, यह जानबूझकर किया गया हमला था

हाईकोर्ट ने मामले की कानूनी बारीकियों को स्पष्ट करते हुए तीन महत्वपूर्ण बातें कहीं:

  1. धारा 307 (हत्या का प्रयास): कोर्ट ने कहा कि आरोपी इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि जलता हुआ पुतला फेंकना एक अत्यंत खतरनाक कृत्य था। इससे गार्ड रूम में मौजूद सुरक्षाकर्मियों की जान जा सकती थी। वह तो सुरक्षाकर्मियों की अच्छी किस्मत थी कि वे बाल-बाल बच गए।
  2. धारा 436 (आगजनी): बचाव पक्ष के इस तर्क को भी खारिज कर दिया गया कि इसके लिए विस्फोटक का होना जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 436 के तहत आग से की गई तबाही भी उतनी ही गंभीर अपराध है।
  3. धारा 285 (लापरवाही): जस्टिस जैन ने कहा कि आरोपियों का कृत्य कोई लापरवाही या भूल नहीं थी, बल्कि यह पूरी तरह से जानबूझकर अंजाम दी गई साजिश थी।
READ ALSO  महाराष्ट्र: पत्नी पर हमला करने के जुर्म में व्यक्ति को छह साल से अधिक सश्रम कारावास की सजा

याचिका खारिज, ₹25,000 का जुर्माना और ‘भारत के वीर’ को मदद

अदालत ने याचिका को पूरी तरह से “आधारहीन” बताते हुए खारिज कर दिया और याचिकाकर्ताओं पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया। यह जुर्माना गृह मंत्रालय द्वारा संचालित स्वैच्छिक योगदान कोष ‘भारत के वीर’ में जमा करने का आदेश दिया गया है, जो केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के शहीदों के परिवारों की मदद करता है।

लोकतांत्रिक मर्यादाओं की याद दिलाते हुए जस्टिस जैन ने अंत में कहा: “विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा को कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता। ‘शूट एंड स्कूट’ की ऐसी हरकतें प्रदर्शन के दायरे में नहीं आतीं। यह बेहद चिंताजनक बात है कि आज समाज का एक हिस्सा विरोध के नाम पर इस तरह की विघटनकारी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है।”

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद, बचाव पक्ष के वकील विमल त्यागी ने कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ आगे अपील दायर करने की योजना बना रहे हैं।

READ ALSO  [UPSC धोखाधड़ी मामला] सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व IAS प्रशिक्षु पूजा खेडकर को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles