छत्तीसगढ़ DMF घोटाला: रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, लेकिन राज्य में एंट्री पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी अनिल टुटेजा को डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) भ्रष्टाचार मामले में बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने टुटेजा की लंबी हिरासत और मुकदमे की सुनवाई (ट्रायल) पूरा होने में होने वाली संभावित देरी को आधार बनाकर यह फैसला सुनाया। हालांकि, कोर्ट ने जमानत के साथ एक सख्त शर्त भी जोड़ी है, जिसके तहत टुटेजा को छत्तीसगढ़ राज्य की सीमाओं से बाहर रहना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि भले ही टुटेजा पर लगे आरोप गंभीर हैं, लेकिन इन पर अंतिम फैसला मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही होगा। वर्तमान में यह मामला उस चरण में है जहां अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज किए जाने हैं।

पीठ ने टिप्पणी की, “आरोपी को 21 अप्रैल 2024 को गिरफ्तार किया गया था और वह हिरासत में है। मामले के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। याचिकाकर्ता के खिलाफ लगभग 85 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने हैं, ऐसे में मुकदमे के निष्कर्ष तक पहुंचने में लंबा समय लगने की संभावना है। हिरासत की अवधि और ट्रायल में होने वाली देरी को ध्यान में रखते हुए, हम याचिकाकर्ता को जमानत देना उचित समझते हैं।”

अदालत में सेवानिवृत्त नौकरशाह का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने दलील दी कि टुटेजा को इस विशेष डीएमएफ (DMF) मामले में औपचारिक रूप से 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। वह 24 जनवरी 2024 से ही विभिन्न भ्रष्टाचार के मामलों में जेल में बंद रहे हैं।

बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट को बताया कि टुटेजा को छह अन्य भ्रष्टाचार के मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी है और केवल यही एक आखिरी मामला था जिसकी वजह से वे हिरासत में थे। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि चूंकि टुटेजा अब सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उनके द्वारा गवाहों को प्रभावित करने या मुकदमे में बाधा डालने की कोई आशंका नहीं है।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मॉब लिंचिंग के मामलों की सूक्ष्म निगरानी करने से किया इनकार

दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ सरकार का पक्ष रख रहे अतिरिक्त महाधिवक्ता रवि शर्मा ने टुटेजा की जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने टुटेजा को राज्य के कई बड़े घोटालों का “मुख्य साजिशकर्ता” बताया।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने साल 2019 के कुछ कथित व्हाट्सएप चैट अदालत के समक्ष पेश किए। उन्होंने आरोप लगाया, “कृपया इन चैट्स को देखें। टुटेजा उस समय चल रहे ‘नान घोटाले’ (NAN Scam) के दौरान अपनी रिहाई को लेकर चर्चा कर रहे थे, जिसके बाद उस मामले में गवाह अपने बयानों से मुकर गए थे।”

READ ALSO  वसीयती क्षेत्राधिकार में भी हाई कोर्ट के पास आपराधिक जांच का आदेश देने की पूर्ण शक्तियां: सुप्रीम कोर्ट

हालांकि, टुटेजा के वकील ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि सालों पुराने इन बयानों का वर्तमान DMF मामले से कोई लेना-देना नहीं है।

सर्वोच्च अदालत ने भी राज्य सरकार की इस दलील को अप्रासंगिक माना। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “ये बातचीत साल 2019 की हैं। वर्तमान मामले में इनकी क्या प्रासंगिकता है? वह तत्कालीन महाधिवक्ता आदि से बातचीत कर रहे थे… हम इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। यह मुकदमे की सुनवाई के दौरान तय होने वाला विषय है।” इसके बाद पीठ ने सेवानिवृत्त अधिकारी को जमानत देने का आदेश जारी कर दिया।

READ ALSO  झारखंड हाईकोर्ट ने सभी थानों में सीसीटीवी लगाने का आदेश दिया; डीपीआर और टेंडर प्रक्रिया 31 दिसंबर तक पूरी करने के निर्देश
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles