सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस आरोपी को जमानत दे दी, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य केंद्रीय मंत्रियों का करीबी सहयोगी बनकर लोगों से करोड़ों की ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 5 फरवरी के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी मोहम्मद कासिफ को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। लगभग तीन साल से हिरासत में बंद कासिफ को कोर्ट ने इस शर्त पर राहत दी है कि वह भविष्य में किसी भी उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल नहीं करेगा।
शीर्ष अदालत ने कासिफ को चल रहे मुकदमे में जांच एजेंसी का पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वह जांच में सहयोग करने से कतराता है, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) उसकी जमानत रद्द कराने के लिए दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के अनुसार, कासिफ का ठगी करने का तरीका बेहद शातिर और तकनीकी रूप से उन्नत था। वह सरकारी विभागों में काम कराने का झांसा देकर सीधे-सादे लोगों से मोटी रकम वसूलता था।
लोगों के मन में अपना रसूख स्थापित करने के लिए, कासिफ ने अपने फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों के साथ अपनी मॉर्फ्ड (डिजिटल रूप से संपादित की गई) तस्वीरें पोस्ट की थीं।
इतना ही नहीं, उसने सरकारी तंत्र में अपनी झूठी पैठ दिखाने के लिए कई फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए थे। जांच में उसके पास से 30 मई 2019 को हुए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह का एक फर्जी आमंत्रण पत्र और 20 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री के साथ ‘एक्सक्लूसिव लंच’ का एक और फर्जी इनविटेशन कार्ड बरामद हुआ।
सत्ता और रसूख के इसी फर्जी खेल के दम पर आरोपी ने राजस्थान सरकार और कई अन्य राज्य विभागों से भारी-भरकम वर्क कॉन्ट्रैक्ट (सरकारी ठेके) भी हासिल कर लिए थे।
कासिफ के इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ तब हुआ जब नोएडा पुलिस ने उसे एक लग्जरी मर्सिडीज कार में जाते हुए बीच रास्ते में रोका। पुलिस ने उसके पास से तीन मोबाइल फोन जब्त किए, जिनकी फॉरेंसिक जांच में सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई मॉर्फ्ड तस्वीरों और धोखाधड़ी के पुख्ता सबूत मिले।
इस मामले में वित्तीय हेराफेरी का पैमाना तब सामने आया जब ईडी ने कासिफ से जुड़े परिसरों पर छापेमारी कर 1.10 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद की। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह पूरी रकम जबरन वसूली और धोखाधड़ी के जरिए जुटाई गई “अपराध की कमाई” (Proceeds of Crime) है।
इस पूरे मामले की नींव राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सर्विलांस चैनलों की सक्रियता से पड़ी थी। सुरक्षा एजेंसियों ने कासिफ की संदिग्ध गतिविधियों पर लगभग दो साल तक पैनी नजर रखी थी। इन पुख्ता इनपुट्स के आधार पर उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर पुलिस स्टेशन में जालसाजी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। इसी केस को आधार बनाकर ईडी ने 19 अप्रैल 2023 को मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी जांच शुरू की थी।
कासिफ के वकील ने अदालत में दलील दी कि मुख्य अपराध (Predicate Offence) में उसे पहले ही जमानत मिल चुकी है और वह 25 मई 2023 से लगातार जेल में बंद है। मुकदमे की सुनवाई में हो रही अत्यधिक देरी को आधार बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार सोमवार को उसकी रिहाई का आदेश जारी कर दिया।

