NEET-UG 2026: ’22 लाख छात्रों के भविष्य पर सीधा हमला’, FAIMA पहुंची सुप्रीम कोर्ट; NTA को बदलने और डिजिटल सुधारों की बड़ी मांग

NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद अब यह कानूनी लड़ाई और तेज हो गई है। डॉक्टरों की प्रमुख संस्था, ‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए नेशनल टेस्टिंग Agency (NTA) के ढांचे में आमूल-चूल बदलाव या इसे पूरी तरह से बदलने की मांग की है। संस्था ने बार-बार हो रहे पेपर लीक को देश के 22.7 लाख मेडिकल उम्मीदवारों के मौलिक अधिकारों पर “सीधा हमला” करार दिया है।

एडवोकेट तन्वी दुबे के माध्यम से दायर इस याचिका में 12 मई को रद्द की गई परीक्षा के बाद उपजे हालातों पर गहरी चिंता जताई गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि NTA अपने प्राथमिक कार्य को सुरक्षित रूप से पूरा करने में “सिस्टमैटिक और विनाशकारी” रूप से विफल रहा है।

FAIMA ने मांग की है कि NTA की जगह एक “मजबूत और स्वायत्त” संस्था का गठन किया जाए। साथ ही, जब तक कोई नया स्थायी निकाय नहीं बनता, तब तक आगामी परीक्षाओं की निगरानी के लिए एक ‘हाई-पावर्ड कमेटी’ बनाई जानी चाहिए। संस्था का प्रस्ताव है कि इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें और इसमें साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ व फॉरेंसिक वैज्ञानिक शामिल हों, ताकि भविष्य में सेंधमारी की कोई गुंजाइश न रहे।

याचिका में राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की जांच का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर जो “गेस पेपर” वायरल हुए थे, उनमें 120 सवाल हूबहू वही थे जो 3 मई की वास्तविक परीक्षा के जीव विज्ञान (Biology) और रसायन विज्ञान (Chemistry) सेक्शन में आए थे।

NTA द्वारा परीक्षा के लिए 5G जैमर्स, GPS ट्रैकिंग और AI कैमरों जैसे दावों पर सवाल उठाते हुए याचिका में कहा गया है कि ये सुरक्षा उपाय केवल “कागजों पर” ही मौजूद थे। आरोप है कि एजेंसी आज भी प्रश्नपत्रों की छपाई और उनके परिवहन के लिए निजी कोरियर और ई-रिक्शा जैसे पुराने और जोखिम भरे तरीकों पर निर्भर है, जिससे लीक का खतरा बना रहता है।

भविष्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए FAIMA ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • CBT मॉडल: परीक्षा को पूरी तरह से ‘कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट’ (CBT) में बदला जाए।
  • डिजिटल लॉकिंग: प्रश्नपत्रों के लिए सुरक्षित डिजिटल लॉकिंग सिस्टम लागू हो।
  • सेंटर-वाइज रिजल्ट: विसंगतियों को तुरंत पकड़ने के लिए सेंटर-वार परिणाम प्रकाशित किए जाएं।
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संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) और 21 (जीवन और आजीविका का अधिकार) का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि परीक्षा की गरिमा बचाने में विफलता एक संवैधानिक संकट है। परीक्षा रद्द होने के कारण 22 लाख से अधिक छात्र और उनके परिवार नई परीक्षा की तारीखों, एडमिट कार्ड और काउंसलिंग शेड्यूल को लेकर भारी मानसिक तनाव और अनिश्चितता में हैं।

सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में NTA, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और CBI को पक्षकार बनाया गया है। साथ ही, CBI से अगले चार हफ्तों के भीतर जांच की प्रगति और अब तक की गई गिरफ्तारियों पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है।

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