मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत के नाम से सोशल मीडिया पर प्रसारित फर्जी बयान की CJI कार्यालय ने की कड़ी निंदा

भारत के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय ने सोशल मीडिया पर प्रसारित एक “नीच, बेशर्म और शरारतपूर्ण” बनावटी ग्राफिक की कड़ी निंदा की है, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत के नाम से विवादास्पद टिप्पणी को गलत तरीके से जोड़ा गया है।

9 मई, 2026 को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में, कार्यालय ने स्पष्ट किया कि X (पूर्व में ट्विटर) पर @UnreservedMERIT नामक अकाउंट द्वारा एक मनगढ़ंत ग्राफिक प्रसारित किया जा रहा है। इस ग्राफिक में सामाजिक वर्गों और प्रणालीगत शोषण से संबंधित एक बयान को CJI के साथ गलत तरीके से जोड़ा गया है।

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मनगढ़ंत बयान

कार्यालय ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे निम्नलिखित फर्जी बयान की पहचान की है:

“अगर एक समाज ख़ुद को IAS, IPS, CJI, President, PM बनकर भी ख़ुद को शोषित ही रखना चाहता है, तो इसमें गलती ब्राह्मणों की नहीं बल्कि उसकी अपनी मानसिकता की है।”

प्रेस विज्ञप्ति में इन आरोपों को “पूरी तरह से निराधार, दुर्भावनापूर्ण और स्पष्ट रूप से गलत” करार दिया गया है।

CJI कार्यालय की टिप्पणियां

कार्यालय ने फर्जी उद्धरणों के निर्माण पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि देश के सर्वोच्च न्यायिक पद को निशाना बनाकर की गई ऐसी हरकतें “घोर बेईमानी” का कार्य हैं।

विज्ञप्ति में आगे कहा गया:

  • यह आचरण “जानबूझकर सामाजिक उकसावे” के समान है और “संवैधानिक मूल्यों की अवमानना” दर्शाता है।
  • ऐसा “लापरवाह आचरण” न्यायपालिका और कानून के शासन में जनता के विश्वास की नींव पर प्रहार करता है।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय ने सभी जिम्मेदार नागरिकों, मीडिया संगठनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों से आग्रह किया है कि वे इस तरह की गलत और बनावटी सामग्री को बढ़ावा देने से बचें। बयान में न्यायिक विमर्श की गरिमा बनाए रखने और सामाजिक वैमनस्य पैदा करने के उद्देश्य से फैलाई जा रही गलत सूचनाओं को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

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