पटना हाईकोर्ट में न्यायपालिका और बार के बीच गतिरोध गहरा गया है। हाईकोर्ट की तीनों बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति (Co-ordination Committee) ने जजों के कथित ‘अमर्यादित’ और ‘अपमानजनक’ आचरण के विरोध में आगामी 11 मई, 2026 को सामूहिक रूप से न्यायिक कार्य से विरत रहने (कार्य बहिष्कार) का निर्णय लिया है।
यह कड़ा कदम जजों द्वारा अदालती कार्यवाही के दौरान वकीलों के प्रति कथित तौर पर अपनाए जा रहे कड़े रुख और ‘अशोभनीय’ टिप्पणियों के विरोध में उठाया गया है।
एक आपातकालीन बैठक के बाद जारी आधिकारिक प्रस्ताव में समन्वय समिति ने बार और बेंच के बीच बढ़ती खाई पर गहरी चिंता व्यक्त की है। प्रस्ताव में सीधा आरोप लगाया गया है कि कुछ जजों का व्यवहार अधिवक्ताओं के प्रति न केवल “अमर्यादित” और “अपमानजनक” है, बल्कि वह “मर्यादा की सीमाओं को लांघने वाला” (hitting below the belt) भी हो गया है।

समिति ने कुछ अदालतों के माहौल को ‘दमघोंटू’ बताते हुए कहा कि कुछ जज स्वयं को “कानून और हर विषय के ज्ञान का एकमात्र स्रोत” (repository of all knowledge) समझने लगे हैं। इस स्थिति के कारण वकीलों के बीच भय और संकोच का माहौल व्याप्त है।
प्रस्ताव में उल्लेख किया गया है कि माहौल इस हद तक बिगड़ चुका है कि अब अनुभवी और वरिष्ठ वकील भी विशिष्ट जजों की अदालतों में पेश होने से कतरा रहे हैं। समिति के अनुसार, “युवा अधिवक्ताओं की तो बात ही अलग है, अब वरिष्ठ सदस्य भी अदालती गरिमा के गिरते स्तर और अपमान के डर से संकोच में हैं।” यह स्थिति कानूनी बिरादरी पर बढ़ते मनोवैज्ञानिक दबाव की ओर इशारा करती है।
इस विरोध का तात्कालिक कारण 7 मई, 2026 को कार्यवाहक रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी ‘नोटिस संख्या 3’ को बताया जा रहा है। समन्वय समिति ने इस नोटिस के प्रति अपनी “एकजुट और स्पष्ट” नाराजगी जताई है। बार का मानना है कि यह नोटिस उनके प्रति बेंच के उपेक्षापूर्ण और नकारात्मक दृष्टिकोण का प्रमाण है।
समिति ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर निर्देश दिया है कि 11 मई, 2026 को सुबह 10:30 बजे से सभी अधिवक्ता अपने पेशेवर दायित्वों का परित्याग कर हड़ताल पर रहेंगे।

