आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि क्लेम पिटीशन (दावा याचिका) का पंजीकरण एक लिपिकीय कार्य (ministerial act) है और ट्रायल कोर्ट नंबरिंग के चरण में ‘मिनी-ट्रायल’ या मालिकाना हक के सबूत की मांग नहीं कर सकते। जस्टिस रवि नाथ तिलहारी ने अनाकापल्ली के ‘X एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज’ द्वारा एक बिना नंबर
