सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि किसी भी भर्ती के लिए न्यूनतम आवश्यक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने की तिथि विज्ञापन के अनुसार आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि ही मानी जाएगी। कोर्ट के अनुसार, जब तक नियमों में स्पष्ट रूप से कुछ और न कहा गया हो, साक्षात्कार या परीक्षा से पहले किसी भी समय योग्यता प्राप्त कर लेने से उम्मीदवार पात्र नहीं हो जाता।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें उन उम्मीदवारों को सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी, जिनके पास आवेदन के समय कानून (Law) की डिग्री नहीं थी।
विचारणीय कानूनी प्रश्न
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुख्य प्रश्न यह था कि क्या अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता हासिल करने की तिथि विज्ञापन के अनुसार आवेदन जमा करने की तिथि होनी चाहिए, या इसे साक्षात्कार प्रक्रिया शुरू होने से पहले किसी भी समय तक स्वीकार किया जा सकता है।
मामले की पृष्ठभूमि
7 मार्च 2024 को राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने सहायक अभियोजन अधिकारी के 181 पदों के लिए विज्ञापन निकाला था। इसके लिए अनिवार्य योग्यता ‘लॉ डिग्री’ (प्रोफेशनल या इंटीग्रेटेड कोर्स) निर्धारित की गई थी।
इस मामले के उत्तरदाताओं ने, जो उस समय कानून के छात्र थे, आवेदन पत्र जमा किए। यह स्वीकार किया गया कि आवेदन की तिथि तक उन्होंने डिग्री प्राप्त नहीं की थी और वे अंतिम वर्ष की परीक्षा में बैठने वाले थे। उन्होंने अंततः 22 अगस्त 2024 को यह योग्यता प्राप्त की।
नवंबर 2024 में RPSC ने प्रेस नोट जारी कर स्पष्ट किया कि जिन उम्मीदवारों के पास आवेदन की अंतिम तिथि तक निर्धारित योग्यता नहीं है, वे अपात्र हैं और उन्हें अपने फॉर्म वापस ले लेने चाहिए। उम्मीदवारों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश और बाद में खंडपीठ ने उम्मीदवारों के पक्ष में निर्णय देते हुए RPSC को उन्हें प्रारंभिक परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का निर्देश दिया था।
कोर्ट का विश्लेषण
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस तर्क से असहमति जताई कि दिशा-निर्देशों की व्याख्या उम्मीदवारों की संख्या बढ़ाने के पक्ष में की जानी चाहिए। पीठ ने गौर किया कि राजस्थान अभियोजन अधीनस्थ सेवा नियम, 1978 के नियम 12 में पहले एक प्रावधान (proviso) था जो अंतिम वर्ष के छात्रों को छूट देता था, लेकिन 10 अक्टूबर 2002 की अधिसूचना द्वारा इस प्रावधान को हटा दिया गया था।
अदालत ने टिप्पणी की:
“उक्त प्रावधान को हटाने के पीछे विधायी मंशा स्पष्ट और असंदिग्ध है, वह यह कि जिन उम्मीदवारों ने प्रासंगिक तिथि तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त नहीं की है, वे संबंधित पद के लिए आवेदन करने के पात्र नहीं हैं।”
विज्ञापन की व्याख्या के संबंध में कोर्ट ने कानूनी सिद्धांत “aliquid prohibetur ex directo, prohibetur et per obliquum” (जिसे प्रत्यक्ष रूप से नहीं किया जा सकता, उसे अप्रत्यक्ष रूप से करने की अनुमति भी नहीं दी जा सकती) का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि डिग्री ‘होने’ (possess) की शर्त में वे उम्मीदवार स्वतः बाहर हो जाते हैं जो भविष्य में इसे प्राप्त करने वाले हैं।
पीठ ने आगे कहा:
“निर्धारित पात्रता शर्त स्पष्ट रूप से प्रासंगिक समय पर डिग्री होने की मांग करती है। इसके अलावा, उत्तरदाताओं के इस तर्क को स्वीकार करने से कि साक्षात्कार से पहले योग्यता प्राप्त करने वालों को पात्र माना जाए, चयन प्रक्रिया में अनिश्चितता पैदा होगी और RPSC पर बाद में प्राप्त योग्यताओं की जांच करने का अनुचित प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि RPSC द्वारा 29 नवंबर 2024 को जारी प्रेस नोट ने बीच प्रक्रिया में पात्रता शर्तों को नहीं बदला, बल्कि केवल 1978 के नियमों के तहत मौजूदा स्थिति को स्पष्ट किया।
न्यायालय का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने RPSC द्वारा दायर अपीलों को स्वीकार करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के 12 अगस्त 2025 के निर्णय को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि पात्रता का निर्धारण आवेदन जमा करने की तिथि के संदर्भ में ही किया जाना चाहिए।
मामले का विवरण
- केस का शीर्षक: राजस्थान लोक सेवा आयोग बनाम लवंशु सांखला और अन्य
- केस संख्या: सिविल अपील संख्या ___ / 2026 (SLP (C) संख्या 32964 / 2025 से उत्पन्न)
- पीठ: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता
- निर्णय की तिथि: 04 मई, 2026

